बुद्धि व विद्या के दाता गणेश जी परमात्मा का विघ्ननाशक स्वरूप है। हमारे सभी देवताओं में श्रीगणेश का महत्व सबसे विलक्षण है। अत: प्रत्येक कार्य के आरंभ में, किसी भी देवता की आराधना के पूर्व, किसी भी सत्कर्मानुष्ठान में, किसी भी उत्कृष्ट से उत्कृष्ट एवं साधारण से साधारण लौकिक कार्य में भी भगवान गणेश का स्मरण, अर्चन एवं वंदन किया जाता है। गणेशोत्सव के 10 दिनों में गणेशजी की आराधना बहुत मंगलकारी मानी जाती है। उनके भक्त विभिन्न प्रकार से उनकी आराधना करते हैं। अनेक श्लोक, स्तोत्र, जाप द्वारा गणेशजी को मनाया जाता है। इनमें से गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ भी बहुत मंगलकारी है। प्रतिदिन प्रात: शुद्ध होकर इस पाठ को करने से गणेशजी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
श्री गणपति अथर्वशीर्ष पाठ के लाभ-
- गणपति अथर्वशीर्ष का कम से कम एक पाठ नियमित करने से शरीर की आंतरिक शुद्धि होती है।
- इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ से मानसिक शांति और मानसिक मजबूती मिलती है।
- इससे दिमाग स्थिर रहते हुए सटीक निर्णय लेने के काबिल बनता है।
- इसके नियमित पाठ से शरीर के सारे विषैले तत्व बाहर आ जाते हैं।
- शरीर में एक विशेष तरह की कांति पैदा होती है।
- जीवन में स्थिरता आती है।
- कार्यों में बेवजह आने वाली रूकावटें दूर होती हैं।
गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने के लिए प्रतिदिन अपने पूजा स्थान या किसी शुद्ध स्थान पर स्नानादि करके शांत मन से बैठ जाएं।
- रीढ़ एकदम सीधी रखते हुए बैठें और पाठ करें।
- इसका पाठ करने के लिए किसी पूजा की आवश्यकता नहीं होती।
- भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा या फोटो सामने ना हो तो भी चलेगा।
- इसका पाठ नियमित करना चाहिए, लेकिन प्रत्येक माह आने वाले विशेष दिन जैसे संकष्टी चतुर्थी के दिन शाम के समय 21 पाठ करना चाहिए।
- गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ के साथ यदि एक माला ऊं गं गणपतये नम: की जपी जाए तो और भी अधिक लाभदायक होता है।
- इसका पाठ महिलाओं के लिए भी बहुत लाभदायक होता है।

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