भगवान की कृपा को समझना बड़ा कठिन || Vaibhav Vyas


 भगवान की कृपा को समझना बड़ा कठिन

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नारद जी यत्र-तत्र सभी जगह घूमने वाले देव माने गए हैं। ऐसे ही एक बार घूमते-घूमते नारद जी पृथ्वी लोक में आए और देखा कि जो भगवान के भक्त हैं वो तो निर्धन हैं और जो भगवान की भक्ति से विमुख हैं उनके पास धन-दौलत है। नारद जी इसका समाधान पाने के लिए भगवान श्री विष्णु हरि के लोक में गए। वहां नारद जी ने भगवान से प्रश्न किया कि प्रभु आपके भक्त निर्धन क्यों होते हैं? भगवान बोले - नारद जी! मेरी कृपा को समझना बड़ा कठिन है।

इतना कहकर भगवान नारद के साथ साधु भेष में पृथ्वी पर पधारे और एक सेठ जी के घर भिक्षा मांगने के लिए द्वार खटखटाने लगे। सेठ जी बिगड़ते हुए द्वार की ओर आए और देखा तो दो साधु खड़े हैं।

भगवान बोले -भैया! बड़े जोरों की भूख लगी है। थोड़ा सा भोजन मिल जाए। सेठ जी बिगड़कर बोले तुम दोनों को लाज नहीं आती। तुम्हारे बाप का माल है? कर्म करके खाने में लाज आती है, जाओ-जाओ किसी होटल में भिक्षा मांगना। नारद जी बोले - देखा प्रभु! यह आपके भक्तों और आपका निरादर करने वाला सुखी प्राणी है। इसको अभी शाप दीजिये। नारद जी की बात सुनते ही भगवान ने उस सेठ को अधिक धन सम्पत्ति बढ़ाने वाला वरदान दे दिया।

इसके बाद भगवान नारद जी को लेकर एक बुढिय़ा मैया के घर में गए। जिसकी एक छोटी सी झोपड़ी थी, जिसमें एक गाय के अलावा और कुछ भी नहीं था। जैसे ही भगवान ने भिक्षा के लिए आवाज लगायी, बुढिय़ा मैया बड़ी खुशी के साथ बाहर आयी। 

दोनों सन्तों को आसन देकर बिठाया और उनके पीने के लिए दुध लेकर आयीं और.. बोली - प्रभु! मेरे पास और कुछ नहीं है, इसे ही स्वीकार कीजिये।

भगवान ने बड़े प्रेम से स्वीकार किया। तब नारद जी ने भगवान से कहा -प्रभु! आपके भक्तों की इस संसार में देखो कैसी दुर्दशा है, मेरे से तो देखी नहीं जाती। 

यह बेचारी बुढिय़ा मैया आपका भजन करती है और अतिथि सत्कार भी करती है। आप इसको कोई अच्छा सा आशीर्वाद दीजिए। भगवान ने थोड़ा सोचकर उसकी गाय को मरने का अभिशाप दे डाला।

यह सुनकर नारद जी बिगड़ गए और कहा -प्रभु जी! यह आपने क्या किया? भगवान बोले -यह बुढिय़ा मैया मेरा बहुत भजन करती है। कुछ दिनों में इसकी मृत्यु हो जाएगी और मरते समय इसको गाय की चिन्ता सताएगी कि.. मेरे मरने के बाद मेरी गाय को कोई कसाई न ले जाकर काट दे, मेरे मरने के बाद इसको कौन देखेगा? तब इस मैया को मरते समय मेरा स्मरण न होकर बस गाय की चिन्ता रहेगी और वह मेरे धाम को न जाकर गाय की योनि में चली जाएगी।

उधर सेठ को धन बढ़ाने वाला वरदान दिया कि मरते वक्त धन तथा तिजोरी का ध्यान करेगा और वह तिजोरी के नीचे साँप बनेगा।

प्रकृति का नियम है जिस चीज मे अति लगाव रहेगा यह जीव मरने के बाद वही जन्म लेता है और बहुत दुख भोगता है। जीवन में भक्ति की लौ लगी रहने से प्रभु मिलन की आस पूरी होने वाली रहती है।

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