नवरात्रि के तीसरे दिन माता के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है माता रानी का चंद्रघंटा स्वरूप भक्तों पर कृपा करती है और निर्भय और सौम्य बनाता है। मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है, मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए। माता का तीसरा रूप मां चंद्रघंटा शेर पर सवार हैं। दसों हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र हैं। माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां चंद्रघंटा की पूजा में उपासक को सुनहरे या पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए और मां को खुश करने के लिए सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पण करें। फिर देवी चंद्रघंटा की आरती करनी चाहिए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बहुत समय पहले जब असुरों का आतंक बढ़ गया था, तब उन्हें सबक सिखाने के लिए मां दुर्गा ने अपने तीसरे स्वरूप में अवतार लिया था। दैत्यों का राजा महिषासुर राजा इंद्र का सिंहासन हड़पना चाहता था जिसके लिए दैत्यों की सेना और देवताओं के बीच में युद्ध छिड़ गई थी। वह स्वर्ग लोक पर अपना राज कायम करना चाहता था जिसके वजह से सभी देवता परेशान थे। सभी देवता अपनी परेशानी लेकर त्रिदेवों के पास गए। त्रिदेवों ने मां के आवाहन का उपाय बताया, जिससे देवताओं ने मां चन्द्रघंटा को प्रसन्न किया और मां ने असुरों को दंडित किया। इसीलिए भक्तों के लिए माता का यह स्वरूप बेहद कल्याणकारी है।
शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना का फल शीघ्र फलदायी माना गया है। इसी वजह से इस दिन शुभ मुहूर्त सुबह 7.30 से 9 बजे तक- शुभ, दोपहर 12 से 1.30 बजे तक- चर, दोपहर 1.30 से 3 बजे तक- लाभ तथा दोपहर 3 से 4.30 बजे तक- अमृत योग में पूजा करना विशेष फलदायी रहता है।
इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय चौकी पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। फिर गंगाजल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। इसके बाद चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी का घड़ा रख दें। इस पर नारियल रख दें। फिर पूजा का संकल्प लें। फिर वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा समेत सभी देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। पूजा के दौरान आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें।
इस दिन माता को दूध या दूध से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए। साथ ही भोग लगाने के बाद उसको दान भी करना चाहिए। ऐसा करने से मानसिक शांति के साथ-साथ परम सुख की प्राप्ति होती है।
मंत्र-
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

Comments
Post a Comment