फुलेरा दूज का त्योहार बसंत पंचमी और होली के बीच फाल्गुन में मनाया जाता हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फुलेरा दूज पूरी तरह दोषमुक्त दिन माना गया है। इस दिन का हर क्षण शुभ होता है, इसलिए कोई भी शुभ काम करने से पहले मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती।
इस दिन पूरे विधि-विधान से कृष्ण जी और राधा जी की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। फाल्गुन मास की फुलैरा दूज तिथि को राधा-कृष्ण के मिलन की तिथि के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यतानुसार इसी दिन राधा जी ने भगवान श्री कृष्ण के साथ फूलों की होली खेली थी।
फुलेरा दूज मुख्य रूप से बसंत ऋतु से जुड़ा त्योहार है, वहीं वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को अच्छा बनाने के लिए भी इसे मनाया जाता है। फुलेरा दूज वर्ष का अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है, इस दिन कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। फुलेरा दूज में मुख्य रूप से श्री राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जिनकी कुंडली में प्रेम का अभाव हो, उन्हें इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर करने के लिए भी इस दिन राधा-कृष्ण पूजा से समस्याएं दूर होकर प्रेम-सौहाद्र्र बना रहने लगता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फुलेरा दूज का दिन साक्षात श्रीकृष्ण का अंश होता है, इसी वजह से इस दिन का हर क्षण शुभ और मांगलिक माना गया है। इसी वजह से भक्त प्रेम और श्रद्धा से राधा-कृष्ण की उपासना करते हैं तो श्रीकृष्ण उनके जीवन में प्रेम और खुशियां बरसाते हैं।
कृष्ण भक्त इस दिन को बड़े उत्साह से मनाते हैं। राधे-कृष्ण को गुलाल लगाते हैं। भोग, भजन-कीर्तन करते हैं क्योंकि फुलेरा दूज का दिन कृष्ण से प्रेम को जताने का दिन है। इस दिन भक्त कान्हा पर जितना प्रेम बरसाते हैं, उतना ही प्रेम कान्हा भी अपने भक्तों पर लुटाते हैं। इस दिन आप अपने जीवनसाथी के साथ मतभेद दूर करने के उपाय भी कर सकते हैं। इसके लिए यदि जीवन साथी आपकी बात ना समझे तो... सोने वाले पलंग के चारों पावों में गुलाबी धागा बांधें। पलंग के नीचे गंदगी इक_ा न होने दें। सोने के लिए ढेर सारे तकियों का प्रयोग न करें। फुलेरा दूज पर राधे-कृष्ण की उपासना आपके जीवन को सुंदर और प्रेमपूर्ण बना सकती है इसी वजह से इस दिन पूरे आनंद और उल्लास से पर्व को मनाना चाहिए जिससे कृष्ण भक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सके। प्रेम और खुशियां बिखेरने वाला दिन इसे फूलों का त्योहार भी कहते हैं क्योंकि फाल्गुन महीने में कई तरह के सुंदर और रंगबिरंगे फूलों का आगमन होता है और इन्हीं फूलों से राधे-कृष्ण का श्रृंगार किया जाता है। कई स्थानों पर फुलेरा दूज के दिन से ही लोग होली के रंगों की शुरुआत कर देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से ही भगवान कृष्ण होली की तैयारी करने लगते थे और होली आने पर पूरे गोकुल को गुलाल से रंग देते थे।
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