शिवरात्रि पर करें शिवलिंग पर अभिषेक || Vaibhav Vyas


 महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं

शिवरात्रि पर करें शिवलिंग पर अभिषेक

महाशिवरात्रि को साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि माना जाता है। ये दिन विशेष अनुष्ठानों का दिन होता है। इस दिन शिवलिंग की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है। महाशिवरात्रि के दिन व्रत और शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व रहता है जिससे इस दिन की गई पूजा-उपासना विशेष फलदायी हो जाती है। हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। ये दिन शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा और अर्चना का दिन है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस उपलक्ष्य में महादेव के भक्तगण उत्सव मनाते हैं। महादेव का व्रत और पूजन करने के अलावा तमाम मंदिरों से भगवान शिव की बारात निकाली जाती है और विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह किया जाता है। वहीं शिवपुराण में कहा गया है कि महाशिवरात्रि की रात को आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्य के समान प्रभाव वाले शक्तिशाली शिवलिंग के रूप में अवतरित हुए थे. इसलिए इस रात को जागरण की रात्रि कहा जाता है। इस बार महाशिवरात्रि 1 मार्च को मंगलवार के दिन पड़ रही है।

मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मानव जाति के अत्यंत करीब होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन हर शिवलिंग में शिव स्वयं विराजमान होते हैं। ऐसे में शिवलिंग का पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के दिन को बड़े अनुष्ठानों का दिन माना जाता है। इस दिन यदि सच्चे मन से शिवलिंग का पूजन किया जाए तो प्रभु भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।

कहा जाता है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और उसकी आत्मा शुद्ध व निर्मल बनती है। महाशिवरात्रि का दिन महादेव के भक्तों को तमाम यातनाओं से बचाता है। अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखकर महादेव से योग्य वर की कामना करें, तो उनकी कामना जरूर पूरी होती है। वहीं सुहागिन स्त्रियां शिवरात्रि का व्रत करें और महादेव और मां पार्वती का आशीर्वाद लें, तो उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और पति को दीर्घायु प्राप्त होती है।

इस दिन सुबह स्नान करके महादेव और मां पार्वती के सामने व्रत का संकल्प लें, इसके बाद शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। महादेव पर पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, बेर, चंदन, अक्षत, दक्षिणा आदि चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर मंत्र का जाप करें। शिवस्तुति व शिवस्त्रोत का पाठ करें। सुबह और शाम को महादेव और माता पार्वती की आरती करें। संभव हो तो शिवरात्रि की रात में जागरण करके महादेव की चार प्रहर की पूजा करने से भोलेनाथ भक्त के सभी मनोरथ पूर्ण करने वाले होते हैं।

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