भौतिक सुखों का कारण ग्रह शुक्र ग्रह || Vaibhav Vyas


 भौतिक सुखों का कारण ग्रह शुक्र ग्रह

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को समस्त भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। यह तुला और वृष राशि का स्वामी है। जिसकी कुंडली में ये ग्रह प्रबल होता है उसे सभी तरह की भौतिक सुख-सुविधाएं मिलती हैं। इस ग्रह के प्रभाव वाले लोग अपने जीवन में खूब यश और कीर्ति पाते हैं।

शुक्र ग्रह कमजोर होने के लक्षण- कुंडली में शुक्र के कमजोर होने से व्यक्ति को आर्थिक परेशानियां और भौतिक चीजों की कमी सताने लगती है। जीवन में दरिद्रता का आगमन भी शुक्र ग्रह के पीडि़त होने के कारण आती है। व्यक्ति में आकर्षण खत्म हो जाता है। वह साफ-सुथरे तरीके से नहीं रहता है। स्त्री सुख में कमी आ जाती है। वैवाहिक सुख कम हो जाता है। कामुकता शक्ति क्षीण हो जाती है।

शुक्र ग्रह को मजबूत करने के उपाय- शुक्र ग्रह को शुभ बनाने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है-

ऊँ शुं शुक्राय नम: या ऊँ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुं। कुंडली में शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए शुक्रवार का व्रत रखें और मां लक्ष्मी की उपासना करें। शुक्र की शुभता के लिए चींटियों और सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए। शुक्र यंत्र को विधि-विधान से पूजित कर पूजा स्थल पर रखें। शुक्र को प्रबल करने के लिए हीरा और सफेद पुखराज पहना जाता है, लेकिन इसके लिए किसी जानकार की सलाह लेना महत्वपूर्ण रहता है।

शुक्र ग्रह के शुभ होने से सुंदर शरीर वाला पुरुष या स्त्री में आत्मविश्वास भरपूर रहता है। विपरीत लिंग वाले स्वत: ही आकर्षित होने लगते हैं। व्यक्ति धनवान और साधन-सम्पन्न होता है। कवि चरित्र, कामुक प्रवृत्ति यदि शनि मंद कार्य करे तो शुक्र साथ छोड़ देता है। शुक्र का बल हो तो ऐसा व्यक्ति भोग-विलास में अपना जीवन व्यतीत करता है।

अगर कुंडली में शुक्र अशुभ स्थिति में हो तो शारीरिक कठिनाइयों के साथ रिश्तों में भी खटास आती है। कुण्डली के अनुसार विवाह और वैवाहिक सुख के लिए शुक्र सबसे अधिक कारक होता है इसलिए इसके अशुभ होने पर जातक को इसके लिये उपाय करना चाहिए। कुण्डली में शुक्र नीच स्थान पर है और यदि शुक्र ग्रह के कारण आपके जीवन में कुछ उथल-पुथल हो रही है तो ज्योतिषीय सलाह के अनुसार उपाय करने से जीवन में पुन: सुख-सम्पन्नता का वास होने लगता है।

शुक्र ग्रह को सभी के जीवन में रूप-रंग और स्नेह आदि का कारक माना जाता है। सौरमंडल के नवग्रहों में शुक्र का महत्व अधिक है। आकाश में सबसे तेज चमकदार तारा शुक्र ही है। आकाश में शुक्र ग्रह को आसानी से देखा जा सकता है। इसे संध्या और भोर का तारा भी कहते हैं, क्योंकि इस ग्रह का उदय आकाश में या तो सूर्योदय के पूर्व या संध्या को सूर्यास्त के पश्चात होता है। पुराणों अनुसार शुक्र दानवों के गुरु हैं। इनके पिता का नाम कवि और इनकी पत्नी का नाम शतप्रभा है। दैत्य गुरु शुक्र दैत्यों की रक्षा करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। ये बृहस्पति की तरह ही शास्त्रों के ज्ञाता, तपस्वी और कवि हैं। इन्हें सुंदरता का प्रतीक माना गया है। शुक्र के अस्त दिनों में भी शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। इसका कारण यह है कि उक्त वक्त पृथ्वी का पर्यावरण शुक्र प्रभा से दूषित माना गया है। यह ग्रह पूर्व में अस्त होने के बाद 75 दिनों पश्चात पुन: उदित होता है।

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