ज्योतिष में पराक्रम भाव और महत्वकांक्षाओं का सम्बन्ध ।

 अभी कुछ दिनों पहले ही मुझसे एक रोचक प्रश्न पूछा गया। और वह बारह ही भावों में से पराक्रम भाव से संबंधित था। बारह ही भावों में थर्ड हाउस की पोजीशन पराक्रम भाव की, जिससे हम प्रथम उच्चय स्थान के नाम से भी जानते हैं। और वह प्रश्न यह था कि पराक्रम भाव का और महत्वाकांक्षाओं का संबंध कितना गहरा है। हम पराक्रम को किस तरह से देखें और महत्वाकांक्षाओं को किस तरह से देखें। पराक्रम का अर्थ यह है कि जब व्यक्ति अपनी पूरी ही स्थितियों और आशाओं के साथ में फिर से अपने कामकाज को जोशोखरोश के साथ में बढ़ाने का कार्य करता है, जिज्ञासाओं को पूर्ण रूप से जीवन में जगह देता है और वहीं जब भी उसको मौका मिले तो सौ प्रतिशत देकर आगे बढऩे का कार्य करता है, यह है पराक्रम की स्थितियां। और इस बात को भी स्मृतियों में रखा जाना आवश्यक है कि जो थर्ड हाउस की पोजीशन है उसको पराक्रम भाव का नाम दिया गया है और महत्वकांक्षाएं उसके भीतर समाहित है। तो यहां इन दोनों को ही अलग-अलग करके देखने की बजाय आप यह देखें कि ओवरऑल पोजीशन्स रहती है पराक्रम की और उसमें महत्वाकांक्षाओं के सिरे किस तरह से कार्य करते हैं और जीवन पर किस तरह से असर डालते हैं इसको समझने का हम यहां प्रयास करते हैं। 

पराक्रम जब व्यक्तिगत चेष्टाएं पूरे ही जो है सो प्रतिशत स्तर के साथ में कार्य कर रही हो, प्रत्येक क्षण व्यक्ति अपने मनोरथ को, अपने कार्य की स्थितियों को आगे लेकर चल रहा हो तो वहां से एक लगभग-लगभग स्तर के ऊपर यश-मान और प्रतिष्ठा की उस व्यक्ति को प्राप्ति होती हुई दिखाई देती है। वह व्यक्ति अपनी एक्सेपटिब्लिटी को निरन्तर बढ़ाता है। कामकाजी जीवन के अंदर शुरुआत की और प्रत्येक व्यक्ति का चहेता बना। अपने स्तर को एक एक्सपेप्टिब्लिटी को हायर लेवल पर पहुंचाया और वहां से महत्वाकांक्षाओं ने दो सिरों को जाग्रत किया। याद रहे जब उसने काम की शुरुआत की थी, तो उसके पास अपना पराक्रम था, अपना साहस था और जब उस पराक्रम की वजह से उसका नाम बढ़ा तो दो सिरे महत्वाकांक्षाओं के सामने आए। प्रथम सिरे ने कहा कि यहां से मेरी महत्वाकांक्षाएं अपने कामकाज को और ऊपरी स्तर की ओर पहुंचाने की होनी चाहिए। तो वहीं दूसरा सिरा जो निकल कर आया, वह भौतिक अपेक्षाओं का था। मेटेरियलिस्ट लग्जरी को गेन करने का था, जो पारिवारिक अपेक्षाएं हैं उसको पूर्ण करने का था, स्वयं के भीतर से जो फैशीनेशन्स आसपास के वातावरण से जाग्रत हुई उसको पूर्ण करने का था। अब यहां आप देखें कि जिस व्यक्ति ने महत्वाकांक्षाओं को कार्य सिद्धि के साथ में जोड़ा और फाइनेंसियल गेन को एक बाई प्रोडक्ट माना उसने अपने जीवन को पूर्ण रूप से अलग स्तर के साथ में देखा। किन्तु जिस व्यक्ति विशेष ने स्वयं की जो मेटेरियलिस्टक लग्जरी की लाइफ है उसको वहां पर बहुत ज्यादा जगह दे दी तो कई बार समय के साथ में जो ग्रहीय व्यवस्थाएं आती है वो ऐसे असर छोड़ कर जाती है कि व्यक्ति को जिस निर्णय की ओर जाने की चाहत बिलकुल भी नहीं होती, वैसे भी निर्णय वह ले लेता है। एक प्रोपर्टी पर्चेज कर रखी थी, दूसरी प्रोपर्टी की आवश्यकता अभी नहीं थी, किन्तु एक फैशीनस जाग्रत हुई और वह फाइनेंसियल बर्डन बढ़ा दिया गया और लोग कहते भी हैं कि साहब जब हम एक इन्कम के सोर्स के साथ में चल रहे थे, तो प्रत्येक दिन यही सोचते थे कि आज एक कमा रहे हैं, कल दो की तरफ जाएंगे, कल दो से चार की ओर जाएंगे। यह कभी नहीं सोचा कि समय की स्थितियां और उसकी साइकिल एक जैसी नहीं रहती। वह लगातार चेंजेज को सामने लेकर आती चली जाती है तो यहीं पर हम महत्वाकांक्षाओं के सिरे में कार्य सिद्धि को हमेशा ऊपर रखें और जो फाइनेंसियल गेन है उसको बाई प्रोडक्ट समझकर रखना बहुत ज्यादा आवश्यक है। इसीलिए हमेशा आप देखें कि दशम भाव सेल्फ इन्वेस्टमेंट की बात करता है। 

दशम भाव यह कहता है कि हम अपने भीतर कितना समाहित कर सकते हैं। हम अपने भीतर कितनी चेष्टाओं को जाग्रत कर सकते हैं। क्या है व्यक्तिगत जीवन की इच्छाशक्ति, क्या है व्यक्तिगत जीवन की कार्य शक्ति, क्या है व्यक्तिगत जीवन की कार्य सिद्धि और उसके साथ में आने वाला मानसिक सुख जब व्यक्ति इसको पूर्ण रूप से समझकर आगे चलता है तो अपने जीवन को एक नया प्रवाज देने का काम करता है। तो हम भी व्यक्तिगत जीवन में पराक्रम को और महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट करके देखें। निर्णय में ऊहापोह और गफलत उसी समय आ पाती है जब हम अपने बेस की पोजीशन्स को एक बार चैक करके अपनी समय की स्थितियों को ग्रहीय व्यवस्थाओं के साथ जोड़कर नहीं देखते। और कहीं-न-कहीं ऐसे निर्णय लेने के के लिए खुद को बाध्य कर देते हैं जिसकी आवश्यकता आज के समय अंतराल के भीतर बिलकुल भी नहीं थी। तो इस स्तर को समझना बहुत ज्यादा आवश्यक है कि बारह ही भावों के भीतर एक तरह से प्रत्येक स्तर अलग-अलग पोजीशन्स को शो करने वाला होता है जिसको जीवन में जगह देकर समझना बहुत ज्यादा आवश्यक है।

Comments

  1. आपके ज्ञान का पुरा आदर करते हुए,please allow me to admit my honest expression in connection with above blog. मेष का मंगल यदि हो तो उपरोक्त बातें लागु होगी, यदि कर्क का मंगल हो तो तीन पैर वाले 🐂जैसी हालत अनुभव से मेने देखी है..

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