जब कभी भी व्यक्ति एक कंपनी से दूसरी में जाता है। एक व्यापार से किसी और व्यापार की शुरुआत करता है। इस परिवर्तन से पहले एक उत्सुकता रहती है, कुछ संशय भी रहते हैं जो बहुत कम होते हैं। ऊर्जा का स्तर है वो बहुत हावी रहता है। वहां पर व्यक्ति कई सपने संजोता है और साथ में ये भी सोचता है कि जो ये फाइनेंसियल गेन मुझे मिलेगा ये जीवन को संवारने वाला होगा। एक नई दिशा के साथ में मैं अपने सारे ही आयाम स्थापित करता हुआ चला जाऊंगा। जब उस कंपनी में जाता है तो वहां उस माहौल इतना अच्छा नहीं मिलता, परेशानियां सामने आने लगती है। जिस ओहदे के ऊपर वह गया है साथ के कलिग और एसोसियेट्स है वो अप्रत्यक्ष रूप से परेशान करने लगते है जिससे मन पर तनाव हावी होने लगता है। वहीं से निर्णय पर पछतावा आने लगता है।ऐसा लगता है कि शायद बहुत गलत निर्णय ले लिया।
जब हम चेंज से पहले की स्थिति के बारे में विचार करें तो एक ऊर्जा थी। अब वो ऊर्जा खोने लगती है। अपने ही निर्णय के ऊपर लगातार रिग्रेट के साथ व्यक्ति चलने लगता है। ये सोचने लगता है कि यहां से फिर परिवर्तन की ओर कैसे जाऊं। कई बार पुरानी जॉब के साथ कॉल भी करता है कि गुंजाइश बची है क्या। इसी तनाव में गलतियां होने लगती है। जो एक्जिसिटिंग कामकाज होना चाहिए था वहां से ध्यान भंग होने लगता है। गलतियां बढ़ती है तो तनाव और अधिक बढ़ता है।
जब भी जीवन के अंदर ऐसी स्थिति में आ चुके हों जहां से अब निर्णय पीछे मुडऩे की ओर नहीं जा सकता है, आगे जो निर्णय लेना है उसमें समय बाकी है, सामने क्या है। सामने सिर्फ और सिर्फ कर्म है जिसको बढ़ाने के बारे में विचार करना होता है। व्यापार में भी यही स्थिति है। कोई भी ऐसी दशा जहां फैशीनेस हावी होते चले गए। हम एक अच्छे खासे स्तर पर कामकाज बढ़ा रहे थे, किसी व्यक्ति ने कहा आप इस कार्य विशेष में भी शुरुआत कीजिये। वहीं से व्यक्ति एक निवेश की ओर जाता है, फाइनेंसिल बर्डन बढ़ाता है, कुछ ऐसे नए लोगों को जोड़ता है जिनकी आवश्यकता अभी नहीं थी। वहीं से फिर से सोचने लगता है अब इसको कैसे समेटूं। समेटने के स्तर पर जाने पर फाइनेंसियल बर्डन बढ़ाता है, चिंताओं को नए सिरे को जन्म देता है। जबकि अगर वहीं पर रहकर ये प्रयास किया जाए कि हम इसमें सुधार कैसे ला सकते हैं।
ज्योतिषिय विधान वहीं अपने महत्व को दर्शाता है और ये बताता है कि आपको इस समय अंतराल तक अभी और अधिक संघर्ष करना है और जब भाग्य का सहयोग इसके साथ में मिलने लगेगा आप सुधार की ओर भी जा पाएंगे। आप याद कीजिये उन दिनों को जब एक जॉब में गए थे, तनाव था, किन्तु वहीं से आपने लगातार जद्दोजहद की और उस जद्दोजहद से निकलकर अपने जीवन को संवारा भी और आगे बढ़ते चले गए। व्यक्ति पचास-पचपन वर्ष की उम्र में पहुंचकर ऐसे निर्णय की गलती का अनुभव होता है। उस सफर को याद करना चाहिए जहां बार-बार तनाव आए, निकला भी है, किन्तु मानवीय जो चेतनाएं हैं और जो भीतर की सारी की संस्थियां है बारम्बार स्थिति को मसुबीत बताने का कार्य करती है। इससे ज्यादा समस्याएं कभी सामने आई ही नहीं है, जबकि ऐसा नहीं है। हम बार-बार ऐसी राहों से गुजरते हैं और उसके बाद में समाधान की ओर भी चले जाते हैं। ये विश्वास मन में होना चाहिए जो निर्णय ले लिया है, उस पर अडिग रहेंगे और साथ में समय के विधान को जानकर उसके समाधान की ओर भी चलते चले जाएंगे।
Very good lesson
ReplyDeleteजी धन्यवाद
DeleteKosis krenge ji
ReplyDeleteजी जरुर
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