समय की कीमत पहचानें ।

9 से 6 और 6 से 9, कहने को तो कहेंगे सिर्फ आंकड़ों को घूमाकर प्रस्तुत किया गया है, किन्तु जब हम गहराई में जाकर इन आंकड़ों के साथ में खुद को जोड़ते हैं तो समझ में आता है कि यदि इसके वास्तविक स्वरूप को पहचान लिया जाए तो पूरा ही जीवन परिवर्तित होकर रह जाता है। एक व्यक्ति अपने कामकाज की शुरुआत सुबह 9 बजे करता है और शाम को 6 बजे तक कार्य पर जुटा रहता है। पूरी तन्मयता के साथ कार्य करता है। आशातीत सफलता जीवन में संजोई है उसे प्राप्त करता चला जाता है, किन्तु जैसे ही आप अपने सपने को एक वृहद स्वरूप में देखते हैं, आप अपने लक्ष्य को बुलंदियों के साथ देखते हैं तो वही मेहनत सुबह 6 से रात्रि 9 बजे तक के अंतराल में जुड़कर आने वाली होती है। 

जब उन सिरों के साथ जीवन की स्वीकारोक्ति बनती है तो यह समझ लेना चाहिए कि हमको कोई रोकने वाला नहीं है, हमको किसी भी व्यवधान से अब घबराने की आवश्यकता नहीं है। मन के भीतर जब इतना गहरा उजाला आ चुका हो कि आप सूर्योदय का भी इंतजार नहीं करें और अपने कामकाज में लग चुके हों, जो छोटी-सी सफलता या छोटा-सा रिफलेक्शन प्राप्त किया है और उसके बाद में खुद को पूरे तरीके से आपने जोड़कर रख दिया कि अब 15 घंटे, 16 घंटे लगे, मेरा कर्म अब पूर्णतया अपने भीतर समाहित है और मैं सफलता के अलावा अब कुछ और नहीं चाहता हूं। 

जब ऐसी उमंग, ऐसी ऊर्जा और उसके ऊपर जुनून की स्थितियां जीवन में जुडऩे लगती है तो व्यक्ति फिर समय अवधि को नहीं देखता है, केवल कर्म और कर्म को देखता है, तो सफलता आने लगती है। छोटी छोटी गोल बनाकर रखे हैं, हम 9 से 6 तक चल रहे हैं कोई बात नहीं, जब बड़े सपने अपने जीवन में जोड़ चुके हैं तो उसके बाद में इसी समय को पूरी तरह से रेट्रोगेट करके देखना चाहिए। वहीं से आप देखेंगे हम अपने द्वारा किए गए कर्म के आधार पर भावी पीढ़ी के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बनने का कार्य कर रहे हैं जहां से वो लगातार एक उम्मीद को हासिल करने वाले होंगे। यही वजह है कि आप देखते हैं कि जब अनुशासन जीवन में उतरने लगता है, आप अपनी सहज स्वीकारोक्ति के साथ में चलते हैं, किसी व्यक्ति ने आपको समय दिया और आप 10 मिनट देरी से पहुंचते है। धीरे-धीरे छवि बनने लगती है कि ये व्यक्ति देरी से पहुंचता है, वैसी ही हमको इनको जिम्मेदारी सौंपनी है। आप वहीं पांच मिनट पहले पहुंचते हैं तो विश्वस्त बनने लगते हैं। दूसरे स्तर पर सहज स्वीकारोक्ति बनी रहे, कोई भी काम सौंपा गया और आप त्वरित गति से तैयार हैं तो आप वहां से नई बुलंदी के अवसर के साथ खुद को जोड़कर देखने लगते हैं। जब से 6 से 9 के अंतराल में अपना कामकाजी जीवन आने लगता है तो स्वीकारोक्ति, अनुशासन और ऊर्जा और लोगों के साथ जुड़कर चलना, बहानेबाजी को टालकर चलना ये सारे गुण अपने आप प्रतिध्वनित होने लगते हैं। 

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