शहर में पला और बढा बच्चा एक दिन खेत खलिहान देखता है और अपने पिता से कहता है कि काश! यहां पर खेत का छोटा टुकड़ा हमारा भी हो, जहां आकर कुछ दिन रहें। वहीं खेत खलिहानों में खेला और बढ़ा बच्चा जब शहर जाता है और अपने पिता से कहता है यहां एक मकान हमारा भी हो। एक व्यक्ति जो कि ऑफिस में एग्जीक्यूटिव है, आगे जाकर मैनेजमेंट की ओर पहुंचता है। वही सी.ई.ओ. का केबिन देखकर सोचता है कि काश! मैं भी इस केबिन में बैठ पाऊं। ऐसा माहौल देख पाऊं जो डोमिनेशन और अधिकार इस व्यक्ति के पास रहे, पूरे कंपनी को चलाने के, एक दिन मेरे पास में हो। ये सारी ही कामनाएं जब तक कामनाएं रहती है, तब तक ठीक है। जैसे ही हम इन कामनाओं के साथ में अपने जीवन की हीन भावनाओं को जोडऩे लगते हैं, सारी ही महत्वाकांक्षाओं को जोडऩे लगते हैं, उसे वो मिला मुझे क्यों नहीं मिला। मैंने बहुत मेहनत की, प्रतिदिन ऐसी स्थिति देखते हैं, लोग कहते हैं कि सूर्य की दशा में लगभग छह वर्षों तक खुद को तपस्वियों की तरह तपाकर लगातार मेहनत करता था, जो भी स्थितियां सामने होती थी उसे स्वीकार करके चलता था, किन्तु जो लोग मेरे साथ में थे, वो आगे बढ़ते चले गए। मैं आज भी यहीं हूं, मेरा जीवन का सबसे बड़ा दुराव यही है। किन्तु वही व्यक्ति जब चन्द्रमा की और चतुर्थेश चन्द्रमा जो कि चतुर्थ भाव में रहे उनकी दशा को पूरा करके पहुंचता है तो कहता है कि नहीं सूर्यदेव की दशा में जो मेहनत की थी, अंततोगत्वा उसके परिणाम मुझे आगे आने वाले दस वर्षों के भीतर बहुत अच्छे से मिले। उस समय मेरी सोच गलत थी। हम सभी जीवन में कामनाएं रखकर चलते हैं? कामनाएं महत्वाकांक्षाओं का एक दूसरा स्वरूप है। जो जीवन का ईंधन भी है। हम कुछ न कुछ हासिल करने के लिए प्रयासरत रहते हैं और वहीं से जीवन में नए से नए सपने संजोते चले जाते हैं। किन्तु जैसे ही भावना में एक बात लगातार घर करने लगती है कि हमको तो सिर्फ हासिल ही करना है।
आज का जो क्षण आपको कर्म में आनंद दे सकता था, धीरे-धीरे उसमें कमी आने लगती है और हम जो दूसरे के पास में है सिर्फ उसे फैशिनेट होते हैं और आखिरकर चक्र में उलझकर हमारे पास है उसे नगण्य कर देते हैं। जीवन की खुशियों जो सामने है वो समाप्त होने लगती है। बड़ा बंगला नहीं है, लम्बी चौड़ी कार नहीं है, किन्तु घर परिवार के सारे सुख समृद्धि है। वो लोग है जो हमेशा आपका ख्याल रखते हैं, वो लोग हैं जो आपसे पूछते हैं आप स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं या नहीं। या इस समय अंतराल में आप पूरे तरीके से सुरक्षित है या नहीं, ये बड़ी पूंजी है। जो जीवन को ऊर्जा देने वाली होती है। जब हम नहीं है कि स्थितियों में बढ़ते हैं, यह हासिल क्यूं नहीं किया सोचते हैं तो नकारात्मकता सामने आने लगती है। टेंशन बाधाएं जन्म लेने लगती है। जो है उसे सहेज कर रखा जाए। जो नयापन सामना आ रहा है कि कामना करें कि उसे हासिल करे, तो वहां से जीवन को जोडऩा कतई सही नहीं है।
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