जीवन में प्रतिद्वंदिता ।

आप किसी नए खेल को खेलने की शुरुआत करें, जिसका अभ्यास नहीं रहा है। उस ओर जाते हैं तो सबसे पहले सीखते हैं और सीखने के बाद में हम अपने सहयोगी या फिर प्रतिद्वंद्वी को कहते हैं कि आइये, हम इस खेल को पाइंट के साथ आगे बढ़ाते हैं। अब तो हार-जीत का फैसला करने वाले होंगे ही। एक छोटी-सी यात्रा हमको प्रतिद्वंदिता की ओर ले जाने वाली होती है। शुरुआत में भी यही स्थितियां होती थी। जैसे ही खेल सीखा बाद में सीधा और हार के साथ चलना है। यही स्थितियां हमारे साथ पूरे जीवन चलती है। किसी भी एरिया स्पेशिफिक में नालेज पाया, लगता है विजय प्राप्त करके ही आएंगे। लोग कहते हैं कि शेयर मार्केट में दो से तीन या छह महीने का अनुभव हुआ और लगा कि सब कुछ सीख चुके हैं, गणनाएं समाहित हो चुकी है, अब केवल निवेश करना है। निवेश के बाद में अच्छे खासे प्रोफिट एचीव करने हैं। वहीं इन्फोर्मेशन टेक्नालाजी के साथ चले, लगने लगा कि सीख लिया है, अब जो भाषा है उस पर एक्सपर्टीज प्राप्त कर चुके हैं, खुद की कंपनी को बनाते हैं, व्यापार से पहले नौकरी की कुछ महीनों का अनुभव हुआ था। अभी तक मेन मैनजमेंट सीखा नहीं थी, दशाएं सपोर्टिव नहीं थी, किन्तु काम्पीटिशन की भावना मन के भीतर आने लगती है और वहीं से गफलतें जीवन के भीतर आती है। खेल है, खेल की स्थितियां अलग है किन्तु जीवन खेल नहीं है। 

जीवन अनुशासन के साथ में चलता है। कोई भी व्यक्ति एक क्षेत्र में नाम हासिल करता है तो सिर्फ नाम दिखाई देता है। किन्तु वर्षों की तपस्या उस यात्रा के पीछे लगी है, वो देखना आवश्यक है। इसी वजह से हम कहीं पर भी अनुभव ले रहे हैं वो अनुभव भीतर तक आप और ज्यादा गहरे से पैठने दीजिये। जब मन फैशीनेस से दूर हटकर ये कहना शुरू कर दे कि वास्तविकता में इस क्षेत्र की ओर जाया जा सकता है। यहां सफलता हासिल की जा सकती है। कोरी कल्पना नहीं, जहां पर ये बात हो कि आने वाले समय ये कर जाएंगे उसके बाद ये कर जाएंगे फिर तो हम इस क्षेत्र के सिरमौर बन जाएंगे। जब हम उस यात्रा को शुरू करते हैं तो मालूम चलता है कि कौन-कौन सी  परेशानियां सामने आ रही है और कैसे हम उनसे पार पाने वाले होंगे। वहीं उसी खेल की ओर चलते हैं जब हम निरन्तर खेल को अभ्यास की ओर लेकर चलें फिर किसी कांपीटीशिन में जाते हैं तो बारीकियां सीखते हैं। उसके पहले का अभ्यास ही हमारे जीवन का और उस खेल को निखारने का माध्यम मात्र है। तो इसी वजह से निरन्तर अभ्यास स्वयं के ऊपर विश्वास, विश्वास के साथ में चलती हुई कांपीटिशन की यात्रा धीरे-धीरे बढ़े, निरन्तरता बनाए रखने पर वहीं से आस और आस के साथ जुड़ा जीवन अर्थ पक्ष और भौतिकता के साथ चलता है। भौतिकता खुशियां भी देती है वहीं जीवन में महत्वाकांक्षाओं को भी जगाने वाली होती है। ये खेल का उदाहरण था, इसको जीवन के साथ में जोड़कर अवश्य देखें।प्रति 

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