घर के भीतर शाम के समय छह से सात लोग इकट्ठा है और परिवार का एक सदस्य बारम्बार कहता है कि आप सब शांत हो जाओ एक बार मुझे सुनो। मैं यह कहना चाहता हूं। वहीं ऑफिस कल्चर में भी लंच के समय कोई ऐसी ही बातचीत छह से सात लोगों के साथ में चल रही है या इस कम लोग एक साथ खड़े हैं। एक व्यक्ति बार-बार इंटरप्ट करता है और कहता है कि मुझे सुनो पहले। यह स्थितियां जीवन में हम कई बार आब्जर्व करते हैं। और इसक उलट आप दीखिये कि कई बार एक व्यक्ति को सुनने के लिए बहुत देर तक इंतजार भी किया जाता है तो एक व्यक्ति को हम सुनना ही नहीं चाहते। इसके पीछे वजह क्या है? वाणी किस तरह के वाइब्रेशन के साथ में, किस तरह की एनर्जी के साथ में काम करती है इसको समझना बहुत ज्यादा आवश्यक है और वाणी जब भी गहराई प्राप्त करती है, वाणी जब भी अनुभव को भीतर समेट कर शब्दों के प्रवाह के साथ निकलती है। मां सरस्वती का आशीर्वाद जिसके कंठ को और वाणी को प्राप्त हो तो वह निर्बाध गति के साथ में अपनी बात को रख भी पाता है। किन्तु इसके लिए सबसे पहले हम अपनी जन्म पत्रिका के माध्यम से यह जानने का प्रयास भी करें कि कौन से क्षेत्र में हमको ईश्वर प्रदत्त आशीर्वाद पूर्ण रूप से प्राप्त हुआ है।
यहां इस बात पर गौर करने की आवश्यकता है कि जब भी हम अपने जीवन के अनुभवों को सुनाते हैं तो वहां एक निर्बाध गति है। एक फ्लो है। किन्तु जैसे ही कोई बात किसी और रेफरेंस के साथ में शुरू होती है या हमारे अनुभव में नहीं है। किसी सुनी सुनाई बात को हम रख रहे हैं तो वहां अटकने की और भटकने की संभावनाएं ज्यादा रहती है। किसी क्षेत्र के अंदर आपको इनडेफ्थ नॉलेज प्राप्त है। जब आप उस पर बोलना शुरू करेंगे तो कहीं पर भी भटकाव नहीं होगा। कहीं पर भी कोन्फीडेंस की कमी नहीं रहेगी यह एक प्रवृति है जो ईश्वर प्रदत्त गुण है जिसके साथ में व्यक्ति को चलना चाहिए। तो अगर हम भी अपने जीवन से इस पंक्ति को हटाना चाहते हैं कि एक बार मेरी बात सुनो पहले। या फिर किसी व्यक्ति विशेष को रोककर अपनी बात को कहने का प्रयास करना तो ये कहीं-न-कहीं इंटरप्ट करने वाली सोच में आता है और यह भी बताता है कि जिस कम्युनिकेशन के साथ में हम चल रहे हैं उसमें अभी तक बहुत अधिक सुधार की आवश्यकता है। मां सरस्वती की उपासना और आराधना करना और जीवन में जिस क्षेत्र के भीतर हम जुड़े हुए हैं वहां पर भी चरमोत्कर्ष के साथ में अनुभव को हासिल करना और उसको ज्ञान की विधा के भीतर समेटना अत्यधिक आवश्यक है। और जब ऐसी कोई भी भाषा कम्युनिकेशन के भीतर रूपान्तरित होती है तो शब्दों के साथ में आपके नेत्र। नेत्र के साथ में आपकी बॉडी लेंग्वेज। बॉडी लेंग्वेज के साथ में आपका औरा भी बहुत कुछ पोजिटिविटी के साथ में कहता है। ये प्रयोग है जिसको निरन्तर जीवन में दोहराना चाहिए। तो वहां जो आपको सुनने की प्रवृति है और आपको सुनने की जो चेष्टाएं है वो निरन्तर बढऩे की ओर जाना शुरू करेगी।
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