नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।
आपके आसपास बहुत सारे बचपन बड़े हो रहे होंगे, खिल रहे होंगे, नई उम्मीदें पाल रहे होंगे, कई सपने सजा रहे होंगे कि इस क्षेत्र में जाएंगे, इस तरह से काम करेंगे, ये नाम कमाएंगे। खुद के लिए यह सब कुछ अर्जित करते चले जाएंगे।
मैं जिस उम्र के साथ पला बढ़ा, जिस माहौल के साथ में चलता चला गया उसमें मेरे पास स्वयं के लिए बताने का ऐसा कुछ भी नहीं है, जो सामने रखा। एक साधारण-सा जीवन। किन्तु मेरे बचपन की कुछ बातें आपके सम्मुख रखना चाहता हूं, जो आपके आसपास बचपन बड़े हो रहे हैं, उनके काम आए। ये बात उन तक और प्रत्यक्ष तौर पर पहुंचाते चले जाएं। स्मृतियों का आकाश अनंत है और जब वो वर्तमान झिलमिल करता है तो न जाने कितने सुखद क्षण सामने होते हैं। बचपन में पिता-माता और आसपास के लोगों द्वारा पारिवारिक जीवन की चर्चाएं कम हुआ करती थी और वहीं पर रुपये-पैसों का लेन-देन हो गया, जमीन खरीदना है, फ्लेट बनाना है, मुझे याद नहीं आता कि मैंने सुनी हो। किन्तु जब ननिहाल जाता या आस पड़ोस में जाता था, पिता साथ में होते थे, आज भी उनके साथ ये चर्चाएं एक आशीष के रूप में चलती है। जब उनके साथ बैठता हूं यही आध्यात्मिक वार्ताएं होती है। ये नहीं पूछा जाता है कि क्या कर रहे हो। अगर उस समय की बात करता हूं तो जो कर्म-कांड से जुड़ी बातें, ज्योतिष का क्या आधार रहता है, आध्यात्मिकता क्या है। किस तरह कहानियों को जीवन ने समेटा है। किस तरह से प्रेरणा अपने जीवन को दे सकते हैं। दूसरों से देखकर या दूसरों से सीखकर। ये सारे ही चर्चाएं लगातार होती थी।
जब अवचेतन में बातें बैठने लगती है, वो जीवन को नव ऊर्जा के साथ देखता है। बच्चों को अच्छी से अच्छी कुछ हुनर की क्लासेज दीजिये, उनको छोटी सी उम्र में एक्सपर्टीज की ओर ले जाएं, लेकिन बच्चे जब हमसे संवाद नहीं कर रहे हों, माता-पिता संवाद कर रहे हों, बुजुर्ग संवाद कर रहा हो। आप हजारों किलोमीटर दूर बैठकर टेलीफोनिक वार्ता कर रहे हों, बच्चों सुनते हैं, समझते हैं उन विचारों को ग्रहण करते हैं। राजस्थान के जिस क्षेत्र से हूं, जब आंधियां निकल जाती है तो धूल की एक परत छोड़कर जाती है। मैंने पहले भी यह उदाहरण दिया था। आंधियां निकलती है और धूल के कण छोड़कर जाती है तो एक परत जो नजर आती है उसको कई बार हटाना पड़ता है, किन्तु अवचेतन पर इनकी गहराई होती है। बाल मन पर क्या प्रभाव स्थापित हो रहा है, कौन सी बातें आ रही है, वही ऊर्जा का एक माध्यम भी है जो थकने नहीं देता, जो उनको रुकने नहीं देता। जीवन एक नई आशा के साथ में चलता है। कई बार ईश्वर प्रदत्त व्यवस्थाएं हैं, व्यस्तताएं हैं, थकान आती है तो मैं उन्हीं क्षणों के साथ बैठ जाता हूं फिर से एक ऊर्जा को महसूस करता हूं कि जीवन में कर्म लगातार चलना चाहिए। कर्म के प्रतिफल ईश्वर प्रदत्त है किन्तु हम प्रत्येक क्षण के साथ कर्म के साथ चलते चले जाएं। जो आसपास बचपन बड़े हो रहे हैं जब वो युवा वय की ओर जा रहे हैं उनके भीतर इन बातों का, आध्यात्मिक चर्चाओं का आत्मबल दे रहे हैं, जीवन क्या है, आपके अनुभव रुपये-पैसों से दूर हटकर क्या है जब ये समझने लगते हैं तो शायद जीवन सफल होने की ओर जाने लगता है।
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