क्या मन पर नियंत्रण नहीं हैं
उस दिन अचानक आपा खो बैठा जो नहीं बोलना चाहता था वो भी बोल दिया बहुत कोशिश की कि उस दिन पार्टी में नहीं जाऊं किंतु मन पर नियंत्रण नहीं था कुछ जरूरी काम पूरे करने थे लेकिन कल पर टाला और फिर ना जाने कितने कल ऐसे आये कि मैं उस काम को टालता ही चला गया और जब कार्य टले तो सफलता भी टलनी निश्चित थी।
कितनी रातों को संकल्प लिये कि कल सुबह से अनुशासन के साथ जीवन पर शासन होगा लेकिन वर्षों बीत गये ऐसा एक भी दिन सामने नहीं आया ये सारी ही स्थितियां शरीर, मन और मस्तिष्क की आत्मन के साथ जुड़े नहीं होने की वजह से सामने आती हैं।
दूसरी ओर ज्योतिष विज्ञान ये कहता हैं कि चन्द्रमा मन के आधिपति हैं आप देखिये की मन तेज हैं एक ऐसा धावक हैं जो कभी हमारे पकड़ में नहीं आता। वहीं ग्रहों में चन्द्रमा भी तेज गति के आधिपति हैं। इसी वजह से एक क्षण लगने लगता हैं कि सबकुछ हमारा हैं और दूसरे ही क्षण ये लगता हैं कि कोई मेरा नहीं हैं, एक पल में यात्रा शून्य हो जाती हैं तो एक पल में लगता आसमान थाम लेती हैं।
ये समझना होगा कि हम जो भी कार्य करते हैं मन की तीव्रता के साथ में वो कार्य जुड़ता हैं जो भाता है वो जीवन मे चला जाता है और जो नहीं सुहाता वहां से हम भागते चले जाते हैं। इसी वजह से मन को स्थिर करना संभव नहीं हैं किंतु मन के भीतर का जो आवेग हैं उसको थामना जरूरी हैं, उसे दिशा देना जरूरी हैं।
मन अभ्यासी हैं जहां आप निरन्तर होते हैं वहीं काम मन को भाने लगता हैं और जब मन को कुछ सुहाता हैं तो व्यक्ति वहां निश्चित रूप से प्रगति प्राप्त करता हैं। जब कोई संघर्ष की घड़ी सामने होती हैं तो मन वहां से हट जाने को कहता हैं। हमारे डर को विकराल बनाता हैं। हम संकुचित होकर इतना उलझ जाते हैं के कहीं पहुँच ही नहीं पाते।
किंतु मन की इस उलझन की एक चाबी ओर भी हैं जहां आपने अनुभव साथ में रख दिये तो मन जल्दी से हामी भर देगा कि हां ये तो हो सकता हैं, ये द्वार खुल सकते हैं। इसलिए कहा भी जाता हैं की चन्द्रमा मनसो जातः, मन तो तेज रहेगा उन सारी ही स्थितियों की लालसा रखेगा जहां तथाकथित आराम हैं। जहां आराम हैं वहां सफलता कहां हैं किंतु जब आप धीरे-धीरे अभ्यास मन के भीतर से आराम को हटाकर प्रयत्न को स्थापित कर देते हैं तो सफलता को कहीं ढूंढने की जरूरत नहीं हैं। किसी ओर की कहानी से प्रेरणा प्राप्त करने की आवश्यकता ही नहीं हैं।
ज्योतिष विज्ञान अनुसार शिव उपासना और आराधना, ॐकार में लीन होना, शिवलिंग पर जब जल धार या दुग्ध धारा प्रवाहित होती हैं तो वहां अपने चित्त को स्थिर कर जाना मन के भीतर से लोग इस क्षण के आराम को हटा देने का एक माध्यम मात्र हैं।
चन्द्रमा गतिशील हैं हम भी गतिशील रहें। रूकना लक्ष्य को ओझल कर देने के बराबर हैं।
Agree 👍
ReplyDeleteआज मन की स्थिती कुछ ऐसी ही है
Yes I agree with you
ReplyDeleteजी धन्यवाद
Delete👏👏👍
ReplyDeleteजी धन्यवाद
DeleteGreat thought
ReplyDeleteजी बहुत बहुत आभार
DeleteAisa hota h mere saath
ReplyDeleteYes, right.
ReplyDeleteOm namah SHIVAY. 👌👌👌🙏🙏🙏🙏🙏
जी धन्यवाद
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