सेल्फ मार्केटिंग I Self Marketing.

 मार्केटिंग यह शब्द यूं लगता है कि वृहद क्षेत्र की चर्चा मात्र नहीं है। आजकल आधुनिक युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बनकर रह गया है। किसी बिजनस की ओर व्यक्ति जाने की शुरुआत कर रहा है तो उस बिजनस के अंदर क्या-क्या हमारे पास में प्रोडक्ट होने चाहिए, किस तरह से चलेंगे उससे पहले ये सोचने लगता है कि इसकी मार्केटिंग कैसे करेंगे। कोई आर्गेनाइजेशन है तो वह भी प्रयास करती है कि हम अपनी मार्केटिंग के अंदर इनोवेशन कैसे लेकर आएं जिससे लोगों तक पहुंचने में सहूलियत होती चली जाए। हमारे पास में क्या है, अगले व्यक्ति को उसकी आवश्यकता क्यों है ये जो गेप है उसको ब्रिज करने का कार्य करती है मार्केटिंग। किन्तु कई बार व्यक्ति सेल्फ मार्केटिंग की तरफ जाता है, उसको लगता नहीं मार्केटिंग कर रहा है। किन्तु वृहद स्तर के ऊपर विचार नहीं करता है, हमने ये ओब्जर्व किया है। कई बार चर्चाएं होती है। चर्चाएं जब इस आधुनिक युग में होती है तो ऐसे सारे ही शब्द भी सामने आते है। 

दूसरी स्थिति में लोग अपने फैलोशिपी के आधार पर कई बातें बताने का प्रयास भी करते हैं। किसी से बातचीत में सामने आया कि आप जितना रुपया-पैसा इन्फूज करते हैं उतनी ही अच्छी मार्केटिंग करते चले जाते हैं, भले ही प्रोडक्ट की हो चाहे और किसी स्थिति को हो।  इसके उलट जब हम किसी कंपनी का नाम लें, वहां पर एक ट्रस्ट वृद्धि एप्रोच जुड़ी हुई है, एक कंपनी का नाम लिया, दूसरे का भी नाम लिया है, अस्सी प्रतिशत लोग कहते हैं यहां पर ट्रस्ट और स्थायित्व है। हम पहले भी परख चुके हैं। तो ये मार्केटिंग अपने आप ही वहां पर जनरेटर होती और विश्वस्त स्थितियों में जुड़ती चली गई। व्यक्तिश: स्तर भी ऐसे ही चलता है। कोई व्यक्ति आपका कॉल मिस नहीं करता। अगर कोई कारणवश कहीं पर रहा, तो भी दो से पांच मिनट में उसका कॉल फिर से आएगा। आपको कहेगा कि मैं इस कार्य में व्यस्त था इसी वजह से मैं आपका कॉल नहीं उठा पाया। अब हाजिर हूं आप बोलिये बारम्बार ऐसा जब होता है तो एक ट्रस्ट उस व्यक्ति के प्रति डवलप होने लगता है। और उसकी छवि के साथ में जुड़ जाता है कि ये व्यक्ति जिम्मेदारी के साथ में चल रहा है। 

अनुशासन भी वैसी ही सेल्फ मार्केटिंग का एक गुण है। आप देखें कि बारम्बार व्यक्ति एक डिसीप्लेन के साथ में चल रहा है तो उसके साथ में यह बात जुड़ जाती है कि अगर आपको घड़ी की सूई को मिलाना है तो उस व्यक्ति के साथ में मिलाकर देख लीजिये। ये इतनी प्रेसाइज एप्रोच के साथ में चलने वाला व्यक्ति विशेष है। ये भी एक आधार हो गया। वहीं किसी कि कम्युनिकेशन स्कील बहुत अच्छी है तो वहां से भी उस व्यक्ति की सेल्फ मार्केटिंग निकलकर आती है। कहने का आशय यह है कि मार्केटिंग के साथ में आधुनिक स्तर के ऊपर चलते हुए इस शब्द के साथ में जो सबसे गहरा तत्व जुड़ा हुआ है वो है गुण। भले ही कम्पनी का हो चाहे किसी व्यक्ति विशेष का हो। जिस गुण के साथ में ईश्वरीय सत्ता ने हमको यहां पर भेजा है और बारम्बार हम अपने यत्न-प्रयत्न के साथ में चल रहे हैं। अगर उसी स्तर पर हम उस आधार पर अपनी मार्केटिंग को लेकर चलते हैं जिसको करने की आवश्यकता नहीं है। हमारे राजस्थान में कई बार कहा जाता है कि एक व्यक्ति बाद में आता है, उसकी पैठ आगे-आगे चलती है। अर्थ यह है कि आपने जिस तरह से अपनी छवि को बनाया है वो छवि अपने आप ही निरन्तर आपके आगे चलने वाली होती है। और जिस व्यक्ति तक आप पहुंचना चाहते हैं वहां पर आपकी वो इमेज पहले से ही पहुंच चुकी होती है। ये सारी ही सेल्फ मार्केटिंग पोजीशन जिसको करने की आवश्यकता नहीं है जो भीतर का परम तत्व है, उसके साथ में जुड़कर जब हम ऐसे गुण-धर्म सामने लेकर आते हैं तो कहीं पर भी जुड़ाव में दिक्कतें नहीं होती। हम एक फ्लो के साथ में चलने लगते हैं। हमारे कार्य बनते चले जाते हैं। संघर्षों के अंदर भी यही गुण चमक कर सामने आने वाले रहते हैं जिस पर विश्वास करके व्यक्ति को आगे बढऩा होता है।

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