जिज्ञासाएं जीवन का प्रमुख आधार है, जहां पर भी हम अपनी सोच को रोक देते हैं या किसी कामकाज में वर्षों से लगे हुए हैं, कुछ नयापन सामने नहीं आ रहा है तो वहां थोट प्रोसेस में एक सिच्यूएरेशन आने लगता है। जब भी व्यक्ति खुद को कहीं रुका हुआ महसूस करता है तो उसकी जो प्रगति है उसकी गति भी पूरी तरह से रुककर रह जाती है। जब एक कन्वेंशन के साथ चलना शुरू करते हैं, किसी आर्गेनाइजेशन में जाते हैं। पहले से ही यह मालूम चल जाता है कि 3 वर्षों के बाद में ही प्रमोशन होगी, उसके बाद में अगले 5 वर्ष और इंतजार करना पड़ेगा किसी ओहदे पर पहुंचने के लिए।
व्यक्ति का जो थोट प्रोसेस है, वहीं पर स्टफ हो जाता है, कितनी भी मेहनत कर लीजिये आप, किन्तु हमारे लिए प्रगति के आधार तो पहले से ही मानक के रूप में तय है। तो वहां से व्यक्ति की जो क्यूरेस एप्रोच जो सीखने की प्रवृतियां है वो रुकने लग जाती है। हम किसी कामकाज के अंदर इन्वोलव हुए और वहां पर कुछ नया करने का मौका ही नहीं हमारे पास तो व्यक्ति खुद को ब्लॉक कर देता है कि ठीक है रुपया-पैसा प्राप्त हो रहा है उसके साथ में ही हम चलते चले जा रहे हैं। इसके उलट कुछ लोग भले ही सामने की संभावनाओं को कम देखे, अपने लिए सोच के दायरों को बढ़ाते चले जाते हैं, कुछ लोग पूरे जीवन पढऩा नहीं रोकते जिससे कि उनकी जिज्ञासाएं शांत होती चली जाए। यदि मैं राशिवार क्रम में बात करूं तो आप देखिये मंगल राशि के जातक हमेशा पढ़कर अपने लिए कहीं-न-कहीं जिज्ञासाओं की प्रवृतियों को सामने लेकर आते हैं और उसको शांत भी करने वाले होते हैं। कुछ नया सीखने का माध्यम उनके लिए पुस्तक अध्ययन है। वृषभ राशि और तुला राशि शुक्र प्रधान राशि के जातकों के लिए क्यूरेस एप्रोच क्रियेटिविटी के साथ में और कला संबंधी क्षेत्र के साथ में जुड़ी होती है जहां पर भी वो किसी क्रियेटिव फोल्ड को देखते हैं, वहीं प्रथम जाएंगे। अपनी जिज्ञासाओं को लगातार आगे बढ़ाने वाले होंगे। अपनी समझ के दायरों को विकसित करते चले जाएंगे। वहीं मिथुन और कन्या राशि के जातकों की एक्सपेटिब्लिटी जो स्वीकारोक्ति है उसका लेवल बहुत हाई होता है। लोगों के साथ में बहुत जल्दी जुड़ जाना और उनकी सारी ही प्रवृतियां चल रही है, जो उनके कामकाज के तरीके चल रहे हैं, उसको जिज्ञासा के साथ में समझने की ओर जाना तो वहीं कर्क राशि के जातकों के ऊपर लोग विश्वास बहुत जल्द करते हैं और उसी विश्वास के साथ में उनके लिए सीखने की जो प्रगति है वो बहुत अच्छे से तेज होती चली जाती है।
सूर्य प्रधान राशि के जातक किसी भी कामकाज में इन्वोलव होंगे और उसके बाद में अपनी क्यूरेस एप्रोच को लेकर आएंगे। किसी कामकाज की शुरुआत नहीं करेंगे तब तक यही लगने वाला होगा कि यहां पर कुछ नया निकलकर नहीं आने वाला है। किन्तु जैसे ही डवलपमेंट की ओर गए बहुत कुछ नई प्रवृतियां अपने सामने रखते चले जाएंगे तो वहीं धनु और मीन राशि के जातक हमेशा अपने ओब्जर्वेशन के साथ में ज्ञान के आधार को बनाकर चलते हैं। उनका अनुभव जिज्ञासाएं जगाने वाला होता है। किसी क्षेत्र विशेष में अनुभव लिया उसके बाद कुछ नया करने की ठानी। ये उनकी प्रवृति है। शनि देव प्रधान राशि के जातक मकर और कुंभ राशि के जातकों का ओब्जर्वेशन और एनेलेसिस बहुत ज्यादा स्ट्रांग होल्ड लिए हुए होता है। बॉडी लेंग्वेज होती है वो अगले आदमी को संशय में रखने वाली होती है कि हम क्या सोच रहे हैं। हम किस तरह के भाव प्रकट करने वाले हैं या हमारी जो क्यूरेस एप्रोच है उसका रास्ता किस तरफ जा रहा है। जिज्ञासाओं के आधार भी राशिवार क्रम के अंदर ऐसे परिवर्तन को सामने रखने वाले होते हैं। यही जिज्ञासाएं हैं जो प्रत्येक क्षण संभावनाओं को जगाती है। हम किसी व्यक्ति विशेष के साथ में थोड़ी देर बिताते हैं, उसके कामकाज को समझते हैं। उसी के अंदर वही हमारे लिए एक आप्शन को क्रियेट करने का माध्यम बन जाता है। ऐसी सारे ही भावनाओं को हमेशा जाग्रत करके रखने का प्रयास हमको जरूर करना चाहिए।
True👌👍
ReplyDeleteDhanyawad Neeta Ji.
DeleteWow
DeleteWhat a bridge..!
Now we get more knowledge.
God bless you always.
Ji bahut bahut dhanyawad.
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