हर श्वास के साथ उत्साह हो
किसी व्यक्ति के जीवन में ना कोई विशेष उपलब्धि रही, ना ही कोई नाम, ना शोहरत, ना ज्यादा धन-सम्पदा लेकिन फिर भी संतुष्टि का स्तर बहुत अधिक रहा। उसके जीवन में किसी चीज की अधिकता रही तो वह थी संतुष्टि। आदमी ने संतुष्टि के साथ जीवन व्यतीत किया। आशा को आशा ही रहने दिया, निराशा में कभी तब्दील नहीं होने दिया। अब हम यदि थोड़ा और भीतर जाएं तो पाएंगे कि व्यक्ति के जीवन में कम आशाओं ने भी उत्साह को समय-समय पर जन्म दिया। उत्साह का मतलब यही है कि आने वाले समय के लिए पूर्ण रुप से सकारात्मक दृष्टिकोण। अच्छा ही होगा, इस बात पर दृढ़ विश्वास ही कुछ अच्छा होने की शुरुआत हैं।
एक व्यापारी वर्षों से एक ही व्यापार कर रहा है लेकिन जब भी किसी नए सौदे की संभावना होती हैं तो पुनः उत्साह से भर जाता है। एक गृहिणी ने अपनी पूरी जिंदगी परिवार को संभालने व रसोई में भोजन बनाने में निकाल दी लेकिन हर सुबह वापिस उत्साह और उमंग के साथ दिन की शुरुआत करना पूरे परिवार की ऊर्जा का कारण बन जाता है। एक लेखक जीवन में लिखता कम और पढ़ता ज्यादा है तो ऐसे में किसी ने पुस्तक उपहार दी तो उसे खोलकर शीघ्र पढ़ना आरंभ करने की इच्छा भी उत्साह है।
यह हम पर ही निर्भर करता है कि हम कितनी छोटी-छोटी चीजों में आशा और उत्साह को जोड़ने में सफल हो पाते हैं। हम जीवन में किसे सफल कहेंगे अथवा नहीं इसका निर्धारण तो कर पाना बेहद मुश्किल हैं। किन्तु जिसके भीतर नित्य उत्साह होगा वह व्यक्ति सफल ही है। उत्साहित होकर किसी भी मार्ग पर चलना सफलता है और उदासी अथवा हतोत्साहित होकर जीवन में कुछ पा भी लेना व्यक्तिगत तौर पर विफलता है। जिस काम को हम उत्साह के साथ करेंगे वहां हम अपना उत्कृष्ट ही देंगे यह निश्चित है।
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