धन भाव और आपका लग्न
अमूमन द्वितीय भाव के साथ में हम धनागमन की स्थितियों को देखते है। धन भाव प्रमुख तौर पर एक तरह से स्वतंत्र भाव है और वहीं इस भाव को द्रव्य भाव की संज्ञा भी दी गई है। यानि आधुनिक युग में हम जिसे रोटेशन कहते है, वो धन भाव के साथ में जुड़ी हुई स्थिति ही है। प्रमुख तौर पर आप ये पाएंगे कि धनागमन जब लग्न के अनुसार देखते है तो द्वितीय भाव के स्वामी किस स्थिति में है इस आधार पर व्यक्ति बहुत कुछ जानता चला जाता है।
मेष लग्न के लिए धन भाव के अधिपति शुक्र हो जाते है और शुक्र धन भाव के अधिपति होने के साथ-साथ वाणी और कला से भी धन की स्थितियों को बढ़ाते है। तो मेष लग्न के लिए शुक्र की स्थितियां देखनी आवश्यक है।
वृषभ लग्न में बुध धनेश हो जाते है, यहीं से आप धनागमन की संभावनाओं को बुध के साथ जोड़कर देखते है। तो वहीं बुध क्योंकि पारे की प्रकृति के ग्रह है तो ये भी देख लेना चाहिए कि बुध की स्थितियां किस तरह से और कौनसे ग्रह के सम्पर्क में है। क्योंकि बुध उसी ग्रह के गुण धर्म अपनाने वाले होंगे।
मिथुन लग्न के लिए चन्द्रमा धनेश हो जाएंगे। क्षीण चन्द्रमा (पापी ग्रहों के साथ या पापीग्रहों से दृष्ट) यदि हो तो व्यक्ति को बहुत सावधानी से ये ज्ञात करना चाहिए कि धनागमन के साथ दूसरी स्थितियां किस तरह से प्रभावित कर रही है। धन तो प्राप्त हुआ, किंतु खर्च इस तरह से चलें कि परेशानियों ने रूकने का नाम ही नहीं लिया। उस आधार पर आप इस भाव को चन्द्रमा के साथ गहराई से विवेचन में लेकर जाएं।
कर्क लग्न के लिए सूर्यदेव धनेश हो जाते है, व्यक्ति ऐसी स्थिति में धन के लिए अपनी नैतिकता का पतन कभी नहीं करता तथा सूर्यदेव की स्थितियां व्यक्ति को निखार कर तपा कर ही धनागमन देती है।
सिंह लग्न में धनेश स्वयं बुध हो जाते है, तो वहीं बुध की स्थितियां यहां लक्ष्मीनारायण बना रही है या बुधादित्य योग। तो वहीं मानसिकता को प्रभावित करने वाले ग्रह चन्द्रमा या बृहस्पति के साथ बुध हो तो उनसे जुड़े उपाय जरूर करने चाहिए।
कन्या लग्न में स्वयं शुक्र धनेश हो जाएंगे। यदि धनेश धन भाव में ही हो तो व्यक्ति के लिए धनागमन की निर्बाध गति बनी रहती है। साथ में ही श्रेष्ठता के साथ व्यक्ति स्वयं को वाणी में भी एक नया आधार देता है। किंतु ऐसे में जैसे-जैसे धन बढ़ता है, कुटुम्बकीयजनों से व्यक्ति दूर होने लगता है।
तुला लग्न में धनेश मंगल हो जाते है। व्यक्ति को सब कुछ तीव्रता से हासिल करने की आकांक्षाएं रहती है तो साथ में ही मन में ये गणना भी सदैव रहती है कि किस तरह से हम नए से नए रास्ते अपनाते चले जाएं। धन की बढ़ोतरी वाणी में अहम लेकर आती है।
वृश्चिक लग्न में बृहस्पति धनेश हो जाते है तथा यहां के कारकाधिपति भी होते है। बृहस्पति की दृष्टि यदि धन भाव पर हो तो वो ज्यादा सार्थकता देती है, जिस उम्र में जितना हासिल करने की अपेक्षा है, वो उसी रफ्तार में मिलता है।
धनु लग्न में धनेश शनिदेव हो जाते है, इनकी स्थितियां यहां संघर्षों के साथ व्यक्ति को धनागमन देती है तथा व्यक्ति एक-एक रूपये की कीमत बहुत अच्छे से पहचानता है।
मकर लग्न में धनेश स्वयं शनिदेव ही रहते है, ऐसी प्रवृतियों में शनिदेव व्यक्ति को भूमि तथा स्थायित्व संबंधित कामकाज से धनागमन देते है। तो वहीं ऐसा व्यक्ति कुटुम्बकीयजनों के बीच अपनी छवि को उस तरह से नहीं गढ़ पाता। पैतृक सम्पति विवाद परेशान करते है।
कुंभ लग्न में धनेश बृहस्पति हो जाते है तथा ऐसी स्थितियों में व्यक्ति सौम्य तरीके से जीवन में धनागमन देखता है, हालांकि बहुत लम्बे इंतजार के बाद, धनागमन तीव्रता बढ़ती है।
मीन लग्न में धनेश मंगल हो जाते है, यहां आप ये पाएंगे कि रिश्ते बिगाड़ कर भी अपने धन के वजूद को इधर-उधर नहीं होने देता, पैसा जितनी तीव्रता से प्राप्त होता है, उतना ही तेजी से खर्च भी होता है।

सर नमस्कार सर मुझे कौन सा स्टोन पहनना चाहिए धन भाव को मजबूत करने के लिए
ReplyDeleteविषय सम्बन्धित जानकारी के लिये आप हमारे जोधपुर कार्यालय के फोन नंबर 8905521197 पर सम्पर्क कर सकते हैं। धन्यवाद।
DeleteSir m singh rashi k hu to mujhe kya upay krne chahiy chandr or guru k
ReplyDeleteविषय सम्बन्धित जानकारी के लिये आप हमारे जोधपुर कार्यालय के फोन नंबर 8905521197 पर सम्पर्क कर सकते हैं। धन्यवाद।
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