हम जब भी किसी व्यक्ति विशेष की बातचीत का विरोध नहीं करते तो वहां पर जो कम्युनिकेशन गेप या फिर जो वाद-विवाद की आशंका है उसको समाप्त कर देते हैं। हमने किसी भी बात में हां भी भर दी तो विरोध की संभावनाएं रह नहीं जाती किन्तु अगर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के अंदर हम विद्रोह को या विरोध को समाप्त कर देते हैं इस तरह से हां भी भरकर। तो कई बार खुद के लिए फस्र्टेशन की पोजीशन को भी जन्म देने वाले होते हैं । ऑफिस, घर परिवार हो या मित्र हो रिश्तेदार हो, हर एक की बात में हां भी भरते चले गए अपनी जो वैचारिक प्रगतिशीलता थी उसको हमने दबाने का कार्य कर दिया। अपने भीतर की जो जिज्ञासाएं थी, सोच के साथ में जो एक उन्मुक्त स्थिति निकलकर आ सकती थी, उसको हमने पूरे तरीके से समाप्त करके रख दिया। वहां एक फस्र्टेशन पनपने लगती है। वहां अपनी जो सोच की स्थितियां है वो जाग्रत नहीं हो पाती। और यही स्थिति अंतरविद्रोह के साथ में भी है।
व्यक्ति ने एक दिन खुद के लिए एक टास्क को निर्धारित किया कि यह कार्य मैं इस दिन में पूर्ण कर जाऊंगा। जब भी उसने वह कार्य पूरे नहीं किए और शाम को बैठकर सोचा तो एक अंतरविद्रोह पनपा, एक फस्र्टेशन पनपी कि मैं कार्य क्यों नहीं कर पाया। मुझे करना चाहिए था। यहां गलती की कोई भी गुंजाइश नहीं थी। आलस्य की वजह से देरी से रुटीन शुरू हुआ, वहीं खुद को हमने एक तरह से फस्र्टेशन के साथ में लेकर चलना शुरू किया कि कल से गलती नहीं होनी चाहिए। वहीं से व्यक्ति के विद्रोह की प्रवृतियां शुरू हुई। इसको एक और उदाहरण से समझते हैं।
एक व्यक्ति मैदान में अपनी परफार्मेंस लगातार दे रहा है, खिलाड़ी है और जब भी अपनी परफोर्मेंस को पूरी करके या अपने जो खेल का स्तर है उसको पूर्ण करके बाहर की तरफ जाता है तो वह खुद से ही संवाद करने वाला होता है। उसमें कई बार असहमति खुद के साथ होती है। अपनी ही गलतियों के साथ में बारम्बार वह खुद को कचोटता है, परेशान करता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वो कहीं-न-कहीं एक बहुत हायर लेवल के फस्र्टेशन में आ चुका है। इसका अर्थ यह है कि वह एक अंतरविद्रोह के साथ में चल रहा है और खुद को यह बताने का प्रयास कर रहा है कि यह गलती मुझसे क्यों हुई, मैं यहां बहुत बार प्रेक्टिस कर चुका था और यहां पर जो यह गलती हुई है। मैं प्रयास करूंगा कि अगली बार नहीं दोहराऊं और यह अंतरविद्रोह प्रत्येक क्षेत्र के अंदर रहता है।
हम अगर इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी के साथ में जुड़े हुए हैं तो कोडिंग का जो पार्ट है वह बहुत आसानी से पूरा हो सकता था, वहां एक गलती हो गई। हम किसी और ऐसे क्षेत्र के साथ में जुड़े हुए हैं जहां मेन मैनेजमेंट करना होता है। किस व्यक्ति को कौन सा कार्य देना है और कितने समय में वह पूर्ण हो सकता है। यह पूरी ही सिमेटरी वहां स्टेब्लिस की किन्तु एक छोटी-सी गलती हुई और वहीं हम खुद को एक अंतरविद्रोह के साथ में लेकर चलते हैं तो इसकी आवश्यकता प्रत्येक क्षण विद्यमान रहती है। सहमति की भी आवश्यकता है तो वहीं पर असहमति की यानि कि अंतरविद्रोह और विरोध की आवश्यकताएं भी है। इन दोनों ही पलड़ों को बराबर स्तर के ऊपर जब व्यक्ति जीवन में लेकर चलता है तो कई बार व्यर्थ के क्लेसेज को टाल पाता है तो जहां पर विरोध की आवश्यकता है वहां विरोध दर्ज करवा कर खुद को संभाल भी पाता है।
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