जीवन में नई संभावनाएं. New possibilities in Life.

 सब कुछ व्यक्ति के भीतर ही समाया हुआ है। एक क्षण वह खुद को निराशाओं को लेकर चलता है तो दूसरे ही क्षण इतना आशावान हो जाता है लगने लगता है कि जिंदगी में सब कुछ आस-पास है। यह जितनी भी स्थितियां हमारे सामने निकल कर आती है व्यक्ति के मन के सोच के दायरों के साथ में निकलकर आती है, जहां पर चन्द्रमा का प्रभाव भी बहुत गहराई से मौजूद है। इसी वजह से कहा गया है कि "चन्द्रमा मनसो जात:" और व्यक्ति अपने मन की स्थिरता को अगर प्राप्त कर लेता है तो जिस तरह से चन्द्रमा कलाएं परिवर्तित करते हैं व्यक्ति उस तरह से अपनी कलाओं को  मन के भीतर परिवर्तित नहीं करता, किन्तु स्थिर होता चला जाता है 

 यहां सब कुछ कैसे मौजूद है यह समझना भी आवश्यक है। एक क्षण जब हम कबीरदास जी को सुनते हैं तो जीवन में नए आयाम दिखाई देते हैं। जब श्रीकृष्ण श्रीमद् भगवत गीता के माध्यम से कर्म, ज्ञान और भक्ति योग की बात करते हैं तो व्यक्ति वहां से कर्म के आधार को खोजता है और यह सोचने लगता है कि कितनी ऊर्जा के साथ में मैं मेरे कामकाज की ओर चल सकता हूं।

 जब हम मीरा के भजन सुनते हैं तो भक्ति का मार्ग श्रेष्ठ दिखाई देता है। और यही सारे आकल्पन मन के भीतर मौजूद है। हमको इन्हें महसूस करने की आवश्यकता है। जितनी भी निराशाएं, जितनी भी कुंठाएं मन के भीतर है उसे एक तरफ कीजिये और फिर से नए दिन की शुरुआत की ओर लग जाइये।

Comments