विश्वास: व्यक्ति के जीवन का आधार I

 व्यक्ति के जीवन में विश्वास एक बहुत बड़ा आधार है और सबसे महत्वपूर्ण पूंजी भी है। जब हम दशम भाव की  चर्चा करते हैं तो वहां कर्म और इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। जब व्यक्ति को अपने कर्म के ऊपर विश्वास हो गया तो वह आधार कोई हिला नहीं सकता। जब व्यक्ति को अपनी इच्छाशक्ति के ऊपर विश्वास हो गया तो वह आधार कोई हिला नहीं सकता। 

सप्तम भाव जो कि गृहस्थ के साथ में जुड़ा हुआ है। जब आपको अपने गृहस्थ जीवन के ऊपर पूर्णरूप से विश्वास हो गया तो उस आधार को कोई हिला नहीं सकता। 

पंचम भाव शिक्षा के साथ में जुड़ा हुआ है। जब आपको अपनी शिक्षा और जो ज्ञानार्जन की स्थिति है उस पर पूर्णरूपेरण अक्षुण्ण विश्वास हो गया तो वहां पर भी कोई हिला नहीं सकता। 

जिस व्यक्ति को अपने पराक्रम की स्थितियां बहुत अच्छे से ज्ञात है कि मेरी लिमिटेशन क्या है और मुझे पराक्रम किस तरह से दिखाना है वह भी एक विश्वास की गतिविधि है। जो लिक्विडि हाउस है, दूसरा भाव । 

व्यक्ति को जब यह मालूम चल जाता है कि पैसा रोटेशन के साथ में जुड़ा हुआ है तो वहां पर भी उसको अपने कामकाज में विश्वास की गतिविधियां हासिल होती हुई दिखाई देती है और जब यह विश्वास व्यक्ति के भीतर प्रत्येक क्षेत्र विशेष में गहरे से स्थापित हो जाता है तो व्यक्ति किसी भी कामकाज के अन्दर, भले ही थोड़ा-सा थक जाए, रुक जाए, किन्तु हार नहीं मानता यही ज्योतिषिय सिद्धान्त भी कहते हैं और यही व्यक्ति के जीवन की व्यावहारिक आश और उजास भी है।

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