निगेटिव सोच को पॉजिटिव में बदलें...Change Negative thought to positive.

 यह बात भी लोगों से सुनी होगी न जाने कितनी बार सुनी होगी कि हमने जीवन में धोखे बहुत खाए, कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा, किन्तु हम फिर से उठकर खड़े हुए, फिर से चलने लगे, फिर से अपने जीवन को सजाया-संवारा तो व्यक्ति यह कहना भूल जाता है कि धोखे तो हमने लोगों से खाए, किन्तु जब स्थितियों के साथ में हम खड़े हुए वहां पर भी लोग समर्थन करने के लिए मौजूद थे।

 उस समय व्यक्ति पूरा क्रेडिट खुद को दे देता है। जब भी कोई समय गलत आता है तो वहां पर पूरे तरीके से दशाओं के ऊपर हमने वो आक्षेप निर्धारण करने का कार्य कर दिया और जब भी अच्छा समय देखा तो सारा क्रेडिट खुद को दे दिया कि जहां पर पहुंचें, जैसे पहुंचे, सारा हमने किया और नेगेटिविटी आई तो या तो दशाओं की वजह से आई या फिर समय की स्थितियों की वजह से या लोगों के धोखे की वजह से। 

व्यक्ति हमेशा यह तय करके चले कि समर्थन भी लोगों से प्राप्त करता है, विद्रोह भी लोगों से प्राप्त करता है। आसपास की जो पोजीशन्स है, सरकमस्टान्सेज़  कि ड्रेवन एप्रोच में परेशान भी करती है तो कई बार आपको आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम भी करती है। कोई भी व्यक्ति जो कला के क्षेत्र के अंदर है उसको जब तालियां मिलती है, उसको जब तालियों से ऊर्जा मिलती है। धन प्राप्त होता है तो वह और अधिक ऊर्जा से कार्य करता है। अपनी कला को उसने अकेले बैठकर निखारने का काम किया, किन्तु उसको सपोर्ट देने का काम लोगों ने ही किया। 

 यही एक अंतराल की सबसे बड़ी परिभाषा है जिसको व्यक्ति को लेकर चलना चाहिए और जो भी आसपास के महानुभाव हैं, जिनकी वजह से यह जीवन सजा है, संवरा है उन सभी को कर्तज्ञता के भाव के साथ, बारम्बार नमस्कार और धन्यवाद करते चलें। मन के भीतर संतोष व्याप्त होता है।

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