कैसे करें मन को स्थिर ?

 व्यक्ति के मन के भीतर का रहस्य भी बहुत गहरा है। कई बार यही मन लोगों से जुडऩे के लिए लालायित होता है तो कई बार यही मन व्यक्ति को बिलकुल संकुचित करके रख देता है। किसी से जुडऩे की परवाह नहीं। स्वयं के भीतर ही सिमटा हुआ। कई बार इतनी ऊर्जा निकल कर आती है कि आसपास के प्रत्येक व्यक्ति को उत्साहित करके रख देता है तो कई बार इतनी निराशाओं की झलक मन के भीतर से निकलती है कि सब कुछ निराशावादिता के साथ में घिर रह जाता है।

        चन्द्रमा मन और मस्तिष्क की गतिविधियों का आधिपति है। चन्द्रमा की रश्मियां जब भी इस धरा के ऊपर  रहती है तो आप ये पाएंगे कि पूर्णिमा के आसपास उनको ज्यादा महसूस किया जा सकता है। अन्यथा चन्द्रमा का  प्रकाश मौजूद तो रहता है किन्तु इतनी स्पष्ट स्तर के ऊपर व्यक्ति उसको इस चकाचौंध भरे दुनिया में महसूस नहीं कर पाता।

मन की मौजूदगी प्रत्येक क्षण उसी तरह है किन्तु तीव्रगामी है और उस तीव्रता को महसूस नहीं किया जा सकता। एक आवरण के साथ में ढकी हुई है जो न जाने क्या-क्या अपने भीतर समेटे हुए है। किस तरह से परिवर्तन को लेकर आ रही है तो हम हमेशा यही प्रयास करें कि मन की स्थिरता रहे। जब भी प्रलोभन की स्थितियां आए, जब भी संशय की स्थितियां आए, दुविधाएं आए। व्यक्ति स्वयं के साथ में थोड़ा-सा समय बिताने वाला हो और मन को स्थिर करने का प्रयास करे। 

 भले ही आप वर्क फ्रॉम होम की स्थिति से जुड़ाव रख रहे हैं या फिर एसेंशियल सर्विसेज के साथ में जुड़े हुए हैं। जिंदगी का मूल तत्व क्या है यह प्रत्येक दिन महसूस करना जरूरी है। हम जो लक्ष्य बना रहे हैं वो सोकोल्ड है तथाकथित है या वाकई में जीवन में उनका बहुत गहरा उद्देश्य है। मेटेरियलिस्ट लाइफ में हम क्या एचीव करना चाहते हैं और स्प्रीच्यूल लाइफ की ओर क्यूं बढऩा चाहते हैं। यह सब कुछ जान लेना बहुत ज्यादा आवश्यक होता है।

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