17 नवम्बर, 2020 के रात्रि काल से ही दैत्य गुरु शुक्र अपनी नीचस्थ राशि कन्या से निकलकर स्वराशि स्थान तुला में प्रवेश कर जाएंगे, जहां 11 दिसम्बर, 2020 तक इनका संचरण चलायमान रहेगा। बुध और शुक्र का जो लक्ष्मीनारायण योग बनता है वो भी 28 नवम्बर, 2020 तक प्रभावी रहने वाला होगा तो जो यह लगभग 24 से 25 दिवस का समय अंतराल है यहां मेटेरियलिस्टिक लाइफ के अंदर क्या चेंज निकलकर आ सकते हैं। कामकाजी जीवन किस तरह से स्मार्ट वर्किंग एप्रोच बनी रहेगी। यदि आप फैशन टेक्नोलॉजी संबंधी किसी भी कामकाज के साथ जुड़ाव रखते हैं, टैक्सटाइल इंडस्ट्री के साथ में और वहीं पर लेखन में जो व्यंग्यात्मक शैली होती है, वहां पर आपका झुकाव बहुत अधिक रहा है। कमीशनिंग और ब्रोक्रेज संबंधी कामकाज के साथ में जीविकोपार्जन आपका चलता है। इंटीरियर डिजाइनिंग के साथ आप जुड़े हुए हैं और व्यक्तिगत जीवन की बात करूं तो आप किसी रिलेशन के साथ में चल रहे हैं तो वहां पर यह तीन सप्ताह और उसके कुछ ऊपर के दिनों का जो यह समय अंतराल है किस तरह का दिशा-निर्देश और संकेत आपको दे रहा है, जिसको जीवन में अपनाकर हम कुछ परिवर्तन सामने लेकर आ सकते हैं।
शुक्र जब भी अपने राशि संचरण को परिवर्तित करते हैं तो व्यक्ति या तो भौतिकता के प्रति लालायित होता है या वहां पर निराशाएं आ पाती है, फ्रस्ट्रेशन जो भी शुक्र के द्वारा जनित होती है वह चमक और दमक के साथ में जुड़ी होती है या तो व्यक्ति कम्पेरिजन से बहुत दूर हो जाए या फिर पूरे तरीके से खुद को कम्पेरिजन्स के अंदर झोंक कर रख दे। जो कई बार लोगों के साथ में एक प्रतिस्पर्धा होती है वह जलन में कब बदल जाती है, मालूम ही नहीं चलता किन्तु यहां पर जो शुक्र का प्रभाव है वह स्वराशि स्थान के साथ में रहेगा और बुध जो कि व्यक्ति को फ्लैक्सीब्लिटी के साथ लेकर चलते हैं उनके साथ में जब इनका गति संचरण दस से बारह दिनों के लिए रहने वाला होगा तो यह प्रभाव भी अति महत्वपूर्ण हो जाता है।
यहां यह भी गौर करने की आवश्यकता है कि सूर्य और बुध का बुद्धादित्य योग जहां पूर्ण होगा, तो वहीं बुध और शुक्र का लक्ष्मीनारायण योग बन जाएगा और वहीं जो ग्रहों में सेनापति मंगल है वो इन दोनों ही ग्रहों को आठवीं दृष्टि से देखने वाले रहेंगे। तो इसी वजह से जो प्रभाव है वहां पर और तीव्रता आ जाती है। जब प्रयासों के अंदर आप और अधिक संलग्न हो जाते हैं तो वहां सफलता की उम्मीद और अच्छे से जागने लगती है। भले ही व्यापारिक जीवन हो, नौकरी पेशा जीवन हो, संवाद के साथ में जुड़ी हुई कार्यशैली हो सभी जगह यह समग्र प्रभाव देखा जाएगा। अभी हम निरन्तर तौर के ऊपर ग्रहीय व्यवस्थाओं के जो परिवर्तन हो रहे हैं उनको सामने रख रहे हैं जिससे कि मंगल जब मार्गी हुए तो उसकी चर्चा की थी।
सूर्य देव नीचस्थ राशि से निकलकर जब वृश्चिक में प्रवेश किए तो उसकी चर्चा की। और अब यह अति महत्वपूर्ण चर्चा शुक्र के साथ में जुड़ी हुई है। आप इस बात पर भी गौर कीजियेगा कि जो स्वास्थ्य में दांतों से संबंधित परेशानियां होती है, और वहीं पर जो मधुमेह जनित रोग होते हैं उनसे सावधान रहना होगा। खान-पान के अंदर जब भी गड़बड़ निकलकर आती है और वहां पर बुध और शुक्र साथ में हो तो थाइराइड जैसे रोगों के साथ में भी व्यक्ति कई बार अपने स्वास्थ्य के अंदर हानि पहुंचते हुए देखता है। तो यहां अनुशासन की आवश्यकताएं रहेगी इस बात पर भी आप पूर्णतया गौर करके चलियेगा। एक क्षेत्र जो कि क्रियेटिव थोट प्रोसेस के साथ में जुड़ा हुआ होता है, जहां व्यक्ति एक अलग नजर के साथ में अपने कामकाज को देखता है। यह समय वहां पर भी बहुत ज्यादा प्रभावशाली रहने वाला है।
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