ज्योतिष में बनने वाली पंचम भाव एवं दशम भाव की स्थिति

 एक विषय की यहां चर्चा सारगर्भित तौर के ऊपर करते हैं। पिता अपने पुत्र को कब व्यापार में संलग्न करे, कब जोड़े। आपने एक पैतृक व्यवसाय को संभाला और लम्बे समय तक उसको एक नया आयाम देने का कार्य किया। अब लगता है कि पुत्र को भी उस व्यापार के साथ में जोड़ा जाए या फिर अपने ही उम्र के अंदर एक बिजनेस की शुरुआत की उसका एक्सपांसन भी कर दिया। अब कौन सा समय ऐसा रहे और कब हम अपने पुत्र को उस व्यवसाय की गतिविधियों में जोड़ें जिससे कि एक समय के बाद में जिम्मेदारियों से मुक्त हुआ जा सके। ऐसी स्थितियों में पिता और पुत्र दोनों की ही होरोस्कोप देखना बहुत ज्यादा आवश्यक हो जाता है। 

पंचम हाउस जब पिता की ओर से देखा जाएगा तो पंचम हाउस से संतान की पोजीशन क्या चल रही है यानि कि अभी वो किस स्थितियों के भीतर गतिमान है। तथा दशा का अंतराल भी यहां बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है तो वहीं जब हम पुत्र की होरोस्कोप देखेंगे तो दशम हाउस, जो कि स्वयं के कर्म का और पिता के कर्म की स्थितियां क्या है, उसको देखने का भाव है। वहां पर भी निर्णायक तौर के ऊपर जानकारी लेना अत्यधिक आवश्यक हो जाता है। पिता की कुंडली में पंचम हाउस की पोजीशन्स स्ट्रांग होल्ड लिए हुए है और उसी ग्रह की दशा अभी चलायमान है और ऐसे समय अंतराल में आप देखें कि अगर पंचम भाव के ग्रह की दशा चलायमान है या फिर केतु या सूर्य जैसे त्वरित गति के साथ में जो स्थितियों को परिवर्तन करने वाले ग्रह हैं उनकी अंतरदशाएं भी आ रही है। सूर्य जो कि प्रकाश देते हैं, और तपाते भी हैं, उनकी अगर दशा आ रही है तब भी आप ये पाएंगे कि ऐसे समय में पुत्र को व्यापार में इंडल्ज किया तो सक्सेस का रेशियो बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पुत्र जो आइडिया उस व्यापार के अंदर सम्मिलित करना चाहते हैं, वहां पर भी व्यवस्थित तौर के ऊपर एक गति दिखाई देती है और वहीं अगर हम देखते हैं कि पुत्र की कुंडली के भीतर दशम हाउस की पोजीशन्स के ग्रह की दशा अभी अगर आने वाली है या कोई ग्रह अपनी सातवीं दृष्टि से या फिर जैसे कि शनि देव तीसरी और दशमी विशेष दृष्टियों के साथ में चलायमान होते हैं। अगर दशम हाउस को देख रहे हों, देव गुरु वृहस्पति पांचवीं या नौवीं, जो कि विशेष दृष्टि है, उससे अगर दशम भाव को देख रहे हों तो ऐसे समय अंतराल में संतान पक्ष अपने पिता के व्यवसाय के साथ में जुड़ सकती है। लम्बे समय से नौकरी करती हुई स्थितियां रही। आपको लगता है कि पिता के व्यवसाय को जो एक सेच्यूरेशन के पाइंट  के साथ में चलायमान है उसमें बहुत पोजीटिव चेंजेंज किए जा सकते हैं तो आप ऐसे समय का व्यवस्थित तौर के ऊपर लाभ उठाएं और फिर आप देखते हैं कि समय के साथ किए गए प्रयास वैसे ही एक नई पोजीशन आपको देने वाले हो जाते हैं और उसके अंदर कब एडोन करना है, कब हमको उस व्यवसाय को और ज्यादा बढ़ाना है वो उसके बाद की दशाओं के ऊपर निर्भर करने वाली एक स्थिति रहती है। 

 पंचम हाउस और दशम हाउस की पोजीशन्स को पिता और पुत्र की होरोस्कोप के साथ में सम्मिलित कर देखना बहुत ज्यादा आवश्यक और उसमें भी अंतरदशाओं का अंतराल महादशाओं के अंतराल के साथ में चलना बहुत ज्यादा आवश्यक हो जाता है । जब भी किसी बिजनेस के अंदर किसी व्यक्ति विशेष को जोड़ा जाता है तो उसके कैलिबर के साथ ही साथ उसके समय को भी देखना अत्यधिक आवश्यक है कि इसका समय और भाग्य की गतिविधियां किस तरह से सपोर्टिव लेवल के ऊपर है कई बार बिलकुल निचले स्तर के ऊपर चल रहा व्यापार एक उन्नत स्तर की तरफ पहुंचना शुरू कर देता है और यही गतिविधि अगर नेगेटिव पोजीशन के साथ में हो तो एक सिरे के साथ में ऊंचाई को प्राप्त किया हुआ बिजनेस भी एक नेगेटिव पाइंट की तरफ आ सकता है। तो ये सारी ही केलकुलेशन्स को ध्यान देकर ही बच्चे को व्यापार में सम्मिलित करने की ओर लेकर चलना चाहिए। स्टडीज का रुटीन और व्यापारिक गतिविधियां इन दोनों को ही एक पाइंट के साथ में बहुत अच्छे से नोट करके आप रखें।

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