विचारों का जीवन में महत्व । Importance of thought process in life.

 कहीं विचार करते हुए और विचारों में विचरण करते हुए ही तो पूरा जीवन नहीं निकल रहा है। मन में कई तरह के विचार आते हैं। हम जॉब के साथ में इस बिजनस की ओर चले जाएंगे, हमारे पास ये इनोवेटिव आइडिया है इस ओर बढ़ते हैं, हमको मालूम है कि लगातार चलना होगा किन्तु फिर हम उस विचार को अपना क्यों नहीं पाते हैं। 

रविवार आते हैं, चले जाते हैं। कई बार हम स्वयं के भीतर संकल्प लेते हैं कि 2014 में सोचा था, कि 2021 के साथ अपना आशियाना बनाएंगे। परेलल वर्क की ओर जाएंगे।  हमें विचार करना चाहिए कि हम किस ओर बढ़ रहे हैं तथा बारम्बार अपने संकल्प को शून्य क्यों करते चले जा रहे हैं। मानवीय स्वभाव है। विचार आते हैं। जिस कार्य में हम होते हैं वहां पर भी इनोवेटिव थोट प्रोसेस चलता है किन्तु जब तक उस विचार को अमलीजामा नहीं पहनाया गया तो विचार मन के भीतर शून्य की अवस्था में चलता चला गया। 

जब भी रविवार आये या अवकाश का दिन हो तो एक बार खुद के साथ बैठकर यह विचार करना जरूरी है। फिर से विचार की बात आ गई। ये सोचना जरूरी है उसको क्रियान्विति की ओर ले जाना जरूरी है। ये इनोवेटिव आइडिया, बहुत यूनिक है। कार्य किस तरह से किया जा सकता है। कई बार व्यक्ति सोचता है इस कार्य में तो कंपीटीशन बहुत है, नयापन लाऊंगा तब भी कहीं पहुंच नहीं पाऊंगा, खुद को ही कटघरे में खड़ा करके एक तरह से नकारात्मकता को जन्म दे दिया। इससे मुक्त होना आवश्यक है। वहीं यह सोचें कि प्रयास कैसे कर रहे हैं, प्रयास कौन सी दिशा में कर रहे हैं, बहुत छोटा सा विचार है उस पर भी कार्य की शुरुआत कर दीजिये, मालूम चलेगा कितने संघर्ष हैं। इन संघर्षों से विजय कैसे पाई जाएगी, कम से कम अनुभव मिलेगा, आगे जाकर किसी और कार्य की शुरुआत करनी है तो उसकी रूपरेखा कैसे बनानी है। हर्डल कहां-कहां आ सकते हैं उनसे कैसे खुद को पार पाने की संभावनाओं में उजागर कर पाएंगे ये सब कुछ जान लेना बहुत ज्यादा आवश्यक है।

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