मेष लग्न की कुण्ड़ली में पंचम भाव में बृहस्पति का होना.Jupiter in fifth house in Aries ascendant horoscope

                                         मेष लग्न की कुण्ड़ली में पंचम भाव में बृहस्पति

                                                शिक्षा और आकस्मिक धन लाभ देते है

जब हम पंचम के बृहस्पति की चर्चा करते है तो आप ये देखेंग कि ज्योतिषीय गणनाओं में ये द्वितीय त्रिकोण है। प्रथम प्रकाश ग्रह सूर्यदेव का राशिस्थान है। जब व्यक्ति शिक्षा प्राप्त करता है और उन गुणों को जीवन में उतारता है तो ऐसी स्थितियों में अनुशासन झलकता है, क्षमताओं में वृद्धि होती है। निर्णायक मौकों पर भाग्य साथ होता है। साहित्यिक अभिरूचि साथ-साथ चलती है, संतान पक्ष को समझाने में उम्र का बड़ा हिस्सा बीतता है। तो वहीं भाग्य भाव को या अपने मूल त्रिकोण को देखते हुए बृहस्पति आध्यात्मिक चिंतन देते है। दूसरी ओर आप जितने अनुभव प्राप्त करते है, छोटी उम्र से ही उसकी सीख साथ रहती है। 

यदि बृहस्पति स्वयं के ही नक्षत्र में हो, 12 से 18 अंश के साथ हो, मंगल और शनिदेव जैसे ग्रह भी युति कर रहे हो तो व्यक्ति शिक्षा संबंधित क्षेत्र में बड़ा नाम कमाता है। दूसरी ओर यदि आप लम्बे समय के लिए शेयर मार्केट संबंधित निवेश की ओर जाते है तब भी समय आपके लिए सहजता से बहुत कुछ देता चला जाता है। 

वहीं मैंने विश्लेषण के साथ ये भी महसूस किया है कि एकादश भाव जो कि पुण्य फलों की प्राप्ति का स्थान है, वहां बृहस्पति की दृष्टि और यू कहूं कि अमृतमय दृष्टि, आप जो हासिल करते है, उसे संतुष्टि प्रदान करने वाली होती है। धर्म और अपने कर्म में ऐसा व्यक्ति बहुत गहराई से विश्वास करता है। निर्णायक मौकों पर आत्मविश्वास सहयोग देने वाला होता है। तो वहीं दूसरी ओर जीवन शालीनता के साथ बीतता है, ज्ञान में रूचि और जिज्ञासा ये सबसे बड़ी आशा बनकर सामने आती है, किंतु औचक रूप से खर्चे भी परेशान करते रहते है। 

वहीं पंचम के बृहस्पति की स्थिति प्रत्येक मायने में मेष लग्न के जातक के लिए जीवनकाल में अंहकार को समाप्त करती है, सामाजिक सरोकार को जोड़ती है।

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